Bihar Politics : RJD के अहंकार पर कांग्रेस का पलटवार, क्या अब अलग होंगे रास्ते?

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News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति में वैसे तो कभी शांति नहीं रहती, लेकिन इन दिनों महागठबंधन (Mahagathbandhan) के अंदर जो सिर-फुटव्वल" चल रही है, उसने विपक्ष (NDA) को बैठे-बिठाए मुस्कुराने का मौका दे दिया है। हालात ये हैं कि कल तक जो "भाई-भाई" थे, आज एक-दूसरे को सार्वजनिक तौर पर खरी-खोटी सुना रहे हैं।

ताज़ा मामला राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश अध्यक्ष मांगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) और कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी (Asit Nath Tiwari) के बीच हुई तीखी बहस का है। दोनों ने बयानों के ऐसे तीर चलाए हैं कि लगता है अब इस गठबंधन में सब कुछ ख़त्म होने की कगार पर है।

RJD ने क्या कहा? (The Taunt)

झगड़े की शुरुआत आरजेडी की तरफ से हुई। आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मांगनी लाल मंडल ने कांग्रेस को लेकर कुछ ऐसा कह दिया जो शायद 'दोस्ती के धर्म' के खिलाफ था।
सादी भाषा में कहें तो, आरजेडी ने यह जताने की कोशिश की कि "कांग्रेस का बिहार में अपना कोई वजूद नहीं है और वो सिर्फ RJD की बैसाखी पर चल रही है।" मंडल ने तंज कसते हुए कांग्रेस के वोट बैंक और उनकी ताकत पर सवाल उठाए। उनका इशारा साफ़ था कि बड़े भाई हम हैं, तो हमारी ही चलेगी।

कांग्रेस का पलटवार: "आईना देख लीजिये"

अब भला कांग्रेस चुप कैसे बैठती? पार्टी के तेज-तर्रार प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने आरजेडी को उसी की भाषा में जवाब दिया। उन्होंने बहुत ही कड़े शब्दों में आरजेडी को उनकी "पुरानी हैसियत" याद दिला दी।

तिवारी ने साफ़ कहा कि "जो लोग आज बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, वो भूल गए कि कांग्रेस के बिना उनकी क्या हालत होती थी।" उन्होंने इशारों में याद दिलाया कि जब-जब कांग्रेस ने साथ छोड़ा है, क्षेत्रीय पार्टियों को अपनी जमीन तलाशने में पसीने छूट गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि "अहंकार" किसी का नहीं रहता।

गठबंधन या मजबूरी?

यह सिर्फ़ दो नेताओं का झगड़ा नहीं है, बल्कि यह सीट शेयरिंग और वर्चस्व की लड़ाई है। आरजेडी को लगता है कि बिहार में उनका ही राज चलना चाहिए, जबकि कांग्रेस सम्मानजनक सीटें चाहती है और "पिछलग्गू" बनकर नहीं रहना चाहती।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरह से खुलेआम बयानबाजी हो रही है, यह महागठबंधन के बिखरने की आहट हो सकती है। कार्यकर्ता भी कन्फ्यूज हैं कि चुनाव साथ लड़ना है या एक-दूसरे के खिलाफ!

क्या अलग हो जाएंगे रास्ते?

अभी तक लालू प्रसाद यादव या राहुल गांधी की तरफ से कोई बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय नेताओं ने जो मोर्चा खोला है, उससे खाई चौड़ी होती जा रही है। अगर यही हाल रहा, तो चुनाव से पहले ही बिहार में एक बड़ा राजनीतिक धमाका हो सकता है।

फिलहाल तो जनता मजे ले रही है और देख रही है कि ये "सियासी दंगल" आखिर किस मोड़ पर जाकर ख़त्म होता है।