Bihar Elections : क्या तेजस्वी यादव ने अपने ही भाई की सियासी ज़िंदगी खत्म कर दी? बीजेपी ने लगाया औरंगज़ेब वाला आरोप
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में हमेशा से कुछ न कुछ हलचल रहती है और अब चर्चाओं में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का अंदरूनी मामला आ गया है. बीजेपी (BJP) ने बिहार के उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं. बीजेपी का कहना है कि तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के सियासी करियर को खत्म कर दिया है, और उन्होंने तो अपने पिता लालू यादव (Lalu Yadav) को भी राजनीतिक रूप से एक तरह से 'कैद' कर रखा है.
बीजेपी के एक प्रवक्ता, निखिल आनंद ने तो तेजस्वी यादव की तुलना मुगल बादशाह औरंगज़ेब से कर दी है. उनका आरोप है कि तेजस्वी यादव ने लालू यादव के बेटे के रूप में परिवार की सियासी विरासत और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को हड़पने की कोशिश की है. ये आरोप इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ समय से लालू परिवार के अंदर खटास की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. कहा जा रहा है कि तेजस्वी ने तेज प्रताप को राजनीति में धीरे-धीरे पीछे कर दिया है.
ये मामला उस समय और गरमाया जब 2017 में लालू प्रसाद यादव के परिवार में अनबन की खबरें आईं और सीबीआई ने उनके ख़िलाफ नए केस भी दर्ज़ कर दिए. तब से, राजनीतिक गलियारों में इस बात की खुसुर-पुसुर होती रहती है कि तेज प्रताप, जो लालू यादव के बड़े बेटे हैं, उनको पार्टी में और सरकार में वह भूमिका नहीं मिली जिसकी शायद वह उम्मीद कर रहे थे. अक्सर यह देखा गया है कि तेजस्वी यादव को ही लालू यादव का असली राजनीतिक वारिस माना जाता रहा है, और उन्हें ही सबसे ज़्यादा प्रमुखता मिलती है.
बीजेपी प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा, "तेजस्वी यादव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में एक नए 'औरंगज़ेब' बनकर उभरे हैं." उन्होंने आरोप लगाया कि तेज प्रताप के 'सियासी जीवन का हनन' तेजस्वी ने किया है, और यहां तक कि लालू यादव को भी राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक बनाने की कोशिश की गई है. बीजेपी के मुताबिक, यह सिर्फ पारिवारिक लड़ाई नहीं, बल्कि आरजेडी पर पूरी तरह से कब्जा जमाने की कोशिश है, जिसमें परिवार के अन्य सदस्य (जैसे तेज प्रताप) को जानबूझकर पीछे धकेला जा रहा है.
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे आरोपों से न सिर्फ़ परिवार में कलह की खबरों को बल मिलता है, बल्कि विपक्षी पार्टियों को भी आरजेडी पर हमला करने का एक बड़ा मौका मिल जाता है. अब देखना होगा कि लालू परिवार और आरजेडी इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या यह पारिवारिक रस्साकशी आने वाले चुनावों में पार्टी पर कोई असर डालती है या नहीं.