Bihar Elections 2025: पहले चरण का नामांकन शुरू, लेकिन NDA-INDIA गठबंधन में सीटों पर फंसा बड़ा पेच

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News India Live, Digital Desk: बिहार की चुनावी राजनीति में हलचल चरम पर है! आगामी विधानसभा चुनावों (या लोकसभा चुनावों, अगर लेख का संदर्भ लोकसभा का है, मैं इसे सामान्य 'चुनाव' के रूप में लिख रहा हूँ) के लिए पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन राज्य में बनने वाले दो बड़े राजनीतिक गठबंधनों – राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) – के बीच अभी भी सीटों के बंटवारे को लेकर भारी माथापच्ची चल रही है. यह देरी दोनों ही गठबंधनों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि उम्मीदवारों को मैदान में उतरने और प्रचार शुरू करने में समय लग रहा है.

क्यों हो रही है सीट बंटवारे में देरी?

सीट बंटवारे में देरी के कई कारण बताए जा रहे हैं:

  • विभिन्न दलों की दावेदारी: दोनों ही गठबंधनों में कई छोटे-बड़े दल शामिल हैं, और हर कोई ज़्यादा से ज़्यादा सीटें चाहता है. अपनी-अपनी पार्टी के प्रभाव क्षेत्र और पिछले प्रदर्शन को देखते हुए हर दल अपनी दावेदारी को मज़बूत बता रहा है.
  • अहम नेताओं की भूमिका: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो एनडीए का हिस्सा हैं, और लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान जैसे नेता सीटों के गणित में अहम भूमिका निभा रहे हैं. चिराग पासवान लगातार 'सम्मानजनक सीटों' की मांग कर रहे हैं, जिससे बीजेपी के साथ उनका समझौता थोड़ा पेचीदा हो सकता है. वहीं, इंडिया गठबंधन में भी कांग्रेस, आरजेडी और वामपंथी दलों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं है.
  • जीत की रणनीति: हर दल ऐसी सीटें चाहता है जहाँ उनकी जीत की संभावना सबसे ज़्यादा हो, जिससे गठबंधन के लिए सभी को संतुष्ट करना मुश्किल हो रहा है.

नामांकन शुरू होने के बाद भी असमंजस:

यह स्थिति तब और ज़्यादा मुश्किल हो जाती है जब पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. बिना सीटों का बंटवारा फाइनल हुए, पार्टियों के लिए अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारना और उन्हें प्रचार के लिए तैयार करना एक बड़ी चुनौती है. इसका सीधा असर चुनाव प्रचार की गति और मतदाताओं के मन पर भी पड़ सकता है.

फिलहाल, सभी की निगाहें दोनों गठबंधनों के शीर्ष नेताओं पर टिकी हैं कि वे कब इस सीट बंटवारे की गुत्थी को सुलझाते हैं और चुनावी मैदान में अपने उम्मीदवारों की घोषणा करते हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा गठबंधन पहले अपनी सूची जारी करता है और बिहार की चुनावी रणभूमि में क्या नए समीकरण बनते हैं.