Bihar Election : दिल्ली में बनी बिहार की रणनीति, RJD बनेगी 'बड़ा भाई', कांग्रेस को मिलेंगी सम्मानजनक सीटें!
News India Live, Digital Desk: Bihar Election : बिहार में चुनावी पारा अब धीरे-धीरे चढ़ने लगा है और दिल्ली में इसकी गर्मी महसूस की जाने लगी है. लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद अब सभी की निगाहें बिहार विधानसभा चुनाव पर हैं. इसी बीच, विपक्ष के महागठबंधन ने अपनी कमर कस ली है और चुनाव से काफी पहले ही अपना सबसे बड़ा सिरदर्द सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है.
जी हां, हम बात कर रहे हैं सीटों के बंटवारे की, जिसे लेकर हर बार आखिरी मौके तक खींचतान चलती है. लेकिन इस बार ऐसा लगता है कि महागठबंधन ने अपनी पिछली गलतियों से सबक ले लिया है.
देर रात तक चली बैठक और बन गई सहमति
खबर है कि दिल्ली में महागठबंधन के बड़े नेताओं की एक बहुत ही अहम बैठक हुई. इस बैठक में RJD के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह, RJD के सांसद मनोज झा और लेफ्ट पार्टियों के नेता शामिल हुए.
सूत्रों की मानें तो इस देर रात तक चली बैठक में बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर एक "सैद्धांतिक सहमति" बन गई है. आसान भाषा में कहें तो एक मोटा-मोटा फॉर्मूला तैयार हो गया है कि कौन-सी पार्टी किस भूमिका में रहेगी.
क्या है ये नया 'फॉर्मूला'?
इस बार भी महागठबंधन में RJD ही 'बड़े भाई' की भूमिका में रहेगी. यानी, सबसे ज्यादा सीटों पर लालू यादव की पार्टी RJD ही अपने उम्मीदवार उतारेगी. इसके बाद, कांग्रेस पार्टी को 'सम्मानजनक' संख्या में सीटें दी जाएंगी. वहीं, गठबंधन का हिस्सा रहीं लेफ्ट पार्टियों (CPI-ML, CPI, CPM) को भी उनकी हिस्सेदारी दी जाएगी.
पिछली बार की तरह नहीं होगी कोई गड़बड़
महागठबंधन के नेता इस बार बहुत सावधान हैं. वे नहीं चाहते कि 2020 के विधानसभा चुनाव जैसी स्थिति फिर से बने, जब सीटों को लेकर आखिरी समय तक पेंच फंसा रहा था और जिसका नुकसान गठबंधन को उठाना पड़ा था. इसीलिए इस बार चुनाव से कई महीने पहले ही सीटों के बंटवारे की रूपरेखा तैयार कर ली गई है ताकि सभी पार्टियों को तैयारी का पूरा मौका मिल सके.
हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि किस पार्टी को कौन-सी सीट मिलेगी. यह सिर्फ एक सैद्धांतिक सहमति है. आने वाले दिनों में नेता एक बार फिर बैठेंगे और जीतने की क्षमता के आधार पर एक-एक सीट पर चर्चा करेंगे.
साफ है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन इस बार कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता और एक मजबूत रणनीति के साथ NDA को टक्कर देने के लिए तैयार हो रहा है.