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April 29 2026 10:50 pm

मिडल ईस्ट में महायुद्ध ईरान के खिलाफ जंग में उतरेंगे सऊदी अरब और यूएई WSJ की रिपोर्ट ने दुनिया में मचाया हड़कंप

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News India Live, Digital Desk : खाड़ी क्षेत्र (मिडल ईस्ट) में बारूद की ढेर पर बैठी दुनिया के लिए एक बेहद डरावनी खबर सामने आ रही है। प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की एक रिपोर्ट ने दावा किया है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य मोर्चे पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह केवल दो देशों की जंग नहीं होगी, बल्कि पूरा अरब जगत और पश्चिमी देश इस महायुद्ध की आग में झुलस सकते हैं।

अरब देशों का बदला हुआ रुख: 'न्यूट्रल' से 'एक्टिव' मोड में आए सऊदी-यूएई

अब तक सऊदी अरब और यूएई इस पूरे विवाद में खुद को तटस्थ (Neutral) दिखाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की बढ़ती आक्रामकता और उसके द्वारा समर्थित गुटों के हमलों ने इन तेल समृद्ध देशों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। बताया जा रहा है कि इन दोनों देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर एक गुप्त रक्षा समझौता किया है, जिसके तहत वे ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अपनी जमीन और आसमान का इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं।

अमेरिका का 'मास्टर प्लान' और इजरायल का साथ

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका एक ऐसा 'अरब गठबंधन' तैयार कर रहा है, जो ईरान की घेराबंदी कर सके। इस योजना में इजरायल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब और यूएई का झुकाव इजरायल की रक्षा प्रणालियों (जैसे आयरन डोम और एरो सिस्टम) की ओर बढ़ा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल का कहना है कि अरब देशों को डर है कि यदि ईरान परमाणु शक्ति संपन्न हो गया, तो पूरे क्षेत्र में उनका वर्चस्व खत्म हो जाएगा। इसी डर ने पुराने दुश्मनों को एक मंच पर ला खड़ा किया है।

क्या बंद हो जाएगा हॉर्मुज जलडमरूमध्य?

ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर देगा। यह दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहाँ से वैश्विक तेल की सप्लाई होती है। सऊदी और यूएई की युद्ध में एंट्री का मतलब है कि यह रास्ता पूरी तरह से रणक्षेत्र में बदल जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था धराशायी हो सकती है।

भारत के लिए खतरे की घंटी

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सऊदी अरब और यूएई पर बहुत अधिक निर्भर है। इसके अलावा, लाखों भारतीय इन देशों में काम करते हैं। यदि ये देश युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होते हैं, तो भारत के सामने न केवल तेल का संकट खड़ा होगा, बल्कि वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बन जाएगी। भारतीय विदेश मंत्रालय इस रिपोर्ट के बाद से लगातार अरब देशों के संपर्क में है और स्थिति का आकलन कर रहा है।