Big step of the central Government : नेताओं-अधिकारियों का नाम संदिग्धों से जोड़ने पर लगेगी रोक, आएगा नया बिल
News India Live, Digital Desk: Big step of the central Government : केंद्र सरकार एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है जिसके बाद अब प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों के नाम का इस्तेमाल किसी भी आम नागरिक, सार्वजनिक अधिकारी या आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के साथ सीधे संबंध जोड़ने या जोड़ने का प्रयास करने पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है और संसद के आगामी सत्र में 'कनेक्टिविटी को रोकना, प्रचार पर नियंत्रण, गलत जानकारी और अफवाहों का विनियमन' नामक एक विधेयक पेश करने की तैयारी कर रहा है।
इस विधेयक का उद्देश्य किसी भी अनौपचारिक, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से, खासकर जब वे सार्वजनिक दायरे में आ चुके हों, व्यक्तियों और राजनेताओं या अधिकारियों के बीच बेवजह के संबंध बनाने को रोकना है। इसमें सोशल मीडिया, मौखिक बयानों या किसी भी प्रकार के प्रचार का इस्तेमाल करके ऐसे संबंध स्थापित करने पर प्रतिबंध शामिल है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाले आंतरिक सुरक्षा सलाहकार परिषद की सिफारिशों के बाद इस विधेयक पर कार्य किया गया है। परिषद ने इस बात पर जोर दिया था कि राजनीतिक बयान अक्सर तथ्यों से परे हो सकते हैं, जिसका कानून और व्यवस्था के रखरखाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, कुछ दिनों पहले एक भाजपा नेता द्वारा यह कहना कि "दिल्ली शराब घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नौकरों ने सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए," एक गलत जानकारी या दुष्प्रचार माना जाएगा, क्योंकि मुख्यमंत्री का सीधे तौर पर उस संबंध में नाम जोड़ा गया था।
प्रस्तावित कानून प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और अन्य मंत्रियों की छवियों और प्रतिष्ठानों को बनाए रखने पर केंद्रित है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि मंत्रियों और गिरफ्तार व्यक्ति के बीच सीधा संबंध तब तक नहीं जोड़ा जा सकता जब तक कि उनके बीच एक मजबूत और दस्तावेजित लेनदेन न हो, जो औपचारिक सरकारी चैनलों के माध्यम से स्थापित हुआ हो। इसका मतलब है कि सामान्य मुलाकात, तस्वीरें, भाषण या सोशल मीडिया पोस्ट जैसे सतही कनेक्शन स्वीकार्य नहीं होंगे।
कानून का उद्देश्य देश की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था, शिष्टाचार और नैतिकता को प्रभावित करने वाले किसी भी ऐसे संदर्भ को रोकना है जो बिना किसी आधिकारिक संबंध के नेताओं का नाम किसी अपराधी या विवादित व्यक्ति से जोड़े। सरकार का मानना है कि यह विधेयक ऐसे नाजुक मामलों में फर्जी खबरें, दुर्भावनापूर्ण जानकारी और दुष्प्रचार फैलाने से रोकेगा। विधेयक को लागू करने के लिए जल्द ही मसौदा तैयार किया जाएगा और फिर इसे आगे की मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।