Big move of GST Council: खाद्य, दवा और शिक्षा पर 'शून्य' हो सकता है जीएसटी

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Big move of GST Council: महंगाई की मार झेल रही आम जनता के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर आ सकती है. सूत्रों के अनुसार, जीएसटी परिषद (GST Council)अपनी अगली बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला ले सकती है. इस प्रस्ताव के तहत आम आदमी के लिए सबसे ज़रूरी तीन चीजों - खाद्य उत्पाद, दवाइयां और शिक्षा से संबंधित सेवाओं पर जीएसटी को शून्य (Zero-rated)किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह अब तक का सबसे बड़ा कदम होगा, जिससे सीधे तौर पर करोड़ों परिवारों का बजट सुधरेगा.

क्या है यह प्रस्ताव और इसका क्या मतलब है?

मौजूदा समय में, कई ब्रांडेड और पैक्ड खाद्य उत्पादों, दवाओं और कुछ शैक्षिक सेवाओं पर 5% से लेकर 18% तक का जीएसटी लगता ਹੈ. इस टैक्स का सीधा बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ता है.

सरकार अब इन वस्तुओं को 'कर-मुक्त' (Exempt) करने की बजाय 'शून्य-दर' (Zero-rated) वाली श्रेणी में लाने पर विचार कर रही है.

'कर-मुक्त' और 'शून्य-दर' में क्या है फर्क? (यह समझना ज़रूरी है)

यह जानना बहुत ज़रूरी है कि 'शून्य-दर' (Zero-rated) 'कर-मुक्त' (Exempt) से कहीं ज़्यादा फायदेमंद है.

  • कर-मुक्त (Exempt):जब कोई चीज कर-मुक्त होती है, तो उस पर अंतिम उपभोक्ता से तो कोई टैक्स नहीं लिया जाता, लेकिन उसे बनाने वाली कंपनी को कच्चा माल खरीदने पर जो टैक्स (इनपुट टैक्स) देना पड़ता है, उसकी वापसी (क्रेडिट) नहीं मिलती. इस वजह से कंपनी की लागत बढ़ जाती है और वह इसका बोझ किसी न किसी रूप में ग्राहक पर ही डालती ਹੈ.
  • शून्य-दर (Zero-rated):इसमें भी अंतिम उपभोक्ता से कोई टैक्स नहीं लिया जाता. लेकिन, इसे बनाने वाली कंपनी को अपने कच्चे माल पर दिए गए टैक्स का पूरा रिफंड (इनपुट टैक्स क्रेडिट - ITC)मिल जाता है. इससे कंपनी की लागत कम हो जाती है, जिसका सीधा फायदा ग्राहक को मिलता है और उत्पाद सच में सस्ता होता है.

किन-किन चीजों पर मिल सकती है राहत?

  • खाद्य उत्पाद:गैर-ब्रांडेड अनाज, आटा, दालें, दूध जैसी चीजें पहले से ही जीएसटी के दायरे से बाहर हैं. लेकिन नई व्यवस्था में ब्रांडेड और पैक्ड आटा, दही, पनीर जैसी रोजमर्रा की चीजों को भी शामिल किया जा सकता ਹੈ.
  • दवाइयां:जीवन रक्षक और ज़रूरी दवाओं को इस श्रेणी में लाने पर विचार हो सकता है, जिससे इलाज का खर्च कम होगा.
  • शिक्षा:स्कूल की फीस, कोचिंग और कॉलेज की पढ़ाई जैसी शैक्षिक सेवाओं को इस दायरे में लाने का मतलब होगा कि शिक्षा पर लगने वाला 18% का जीएसटी खत्म हो सकता है.

अगर यह कदम उठाया जाता है, तो यह न सिर्फ़ महंगाई से लड़ने में सरकार का एक कारगर हथियार साबित होगा, बल्कि मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को भी बड़ी राहत मिलेगी। अब सबकी निगाहें जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक पर टिकी हैं।