PCB चीफ की एक और शर्मनाक हरकत! पहले चुराई एशिया कप की ट्रॉफी, अब ACC हेडक्वार्टर से भी कर दी गायब
News India Live, Digital Desk : पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी अपने विवादित कारनामों के लिए एक बार फिर क्रिकेट जगत में हंसी का पात्र बन गए हैं। एशिया कप की ट्रॉफी को अपने घर की शोभा बनाने के बाद, अब उन्होंने एक और शर्मनाक हरकत को अंजाम दिया है। इस बार उन्होंने दुबई में स्थित एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के मुख्यालय से भी एशिया कप की असली ट्रॉफी को हटवा दिया है।
इस घटना के बाद से क्रिकेट जगत में बवाल मचा हुआ है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या PCB चीफ के लिए क्रिकेट की ट्रॉफी किसी निजी जागीर की तरह है, जिसे वह जब चाहें, जहां चाहें रख सकते हैं?
पहले घर ले गए, अब ऑफिस से भी हटवा दी
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ महीने पहले मोहसिन नकवी की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें एशिया कप की चमचमाती ट्रॉफी उनके लाहौर स्थित घर में रखी हुई नजर आ रही थी। इसे लेकर उनकी जमकर आलोचना हुई थी और उन पर "ट्रॉफी चोर" तक के तंज कसे गए थे। लोगों ने कहा था कि यह ट्रॉफी किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे एशिया की शान है और इसे किसी के घर पर सजाना नियमों और खेल भावना का अपमान है।
अब, अपनी उस गलती को सुधारने के बजाय, नकवी ने एक और बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
- क्या किया इस बार?: खबरों के मुताबिक, नकवी ने ACC के अधिकारियों पर दबाव डालकर दुबई हेडक्वार्टर में रखी असली (Original) एशिया कप ट्रॉफी को वहां से हटवा दिया है।
- क्यों किया ऐसा?: कहा जा रहा है कि वह अपनी "चोरी" के आरोपों से इतने शर्मिंदा और बौखलाए हुए थे कि उन्होंने असली ट्रॉफी को ही नजरों से दूर करवा दिया, ताकि कोई यह न कह सके कि उन्होंने अपने घर पर नकली ट्रॉफी रखी थी।
ACC अध्यक्ष जय शाह ने लिया एक्शन!
PCB चीफ की इस बचकानी और गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर ACC के अध्यक्ष जय शाह ने कड़ा रुख अपनाया है।
- असली की जगह रखी रेप्लिका: जय शाह के निर्देश पर, अब ACC मुख्यालय में असली ट्रॉफी की जगह उसकी एक रेप्लिका (Replica) यानी हूबहू नकल को रखा गया है।
- असली ट्रॉफी लॉकर में बंद: असली ट्रॉफी को सुरक्षित तरीके से एक लॉकर में रखवा दिया गया है, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी इस तरह अपनी मनमानी न कर सके और ट्रॉफी की गरिमा बनी रहे।
मोहसिन नकवी की इन हरकतों ने न सिर्फ पाकिस्तान क्रिकेट की छवि को धूमिल किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे सत्ता में बैठे लोग खेल और उसकी परंपराओं का मखौल बना सकते हैं। यह घटना क्रिकेट प्रशासकों की जवाबदेही पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।