पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन हमेशा से राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेदाग माना गया है। उन्हें एक कुशल अर्थशास्त्री और एक सम्मानित राजनेता के रूप में देखा गया, जिनके कार्यकाल को भारत की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, उनके शांत और सादगीपूर्ण जीवन में एक कठिन दौर तब आया, जब उन्हें कोयला खदान आवंटन मामले में आरोपी के रूप में तलब किया गया।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और मनमोहन सिंह का पक्ष
2015 में, कोयला खदान आवंटन में कथित अनियमितताओं के आरोप में डॉ. सिंह को अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी। सिंह ने इस मामले में सार्वजनिक अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए अनिवार्य मंजूरी की आवश्यकता पर सवाल उठाया और कोयला खदान आवंटन में किसी भी प्रकार के अपराध से स्पष्ट रूप से इनकार किया।
कोयला खदान आवंटन में विवाद और कानूनी प्रक्रिया
डॉ. मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें हिंडाल्को को तालाबीरा-2 कोयला खदान के आवंटन में आरोपी के रूप में तलब किया गया था। अपील में उन्होंने तर्क दिया कि उनके निर्णय में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार का आरोप निराधार है और यह सरकारी निर्णय प्रक्रिया से संबंधित मामला है।
याचिका में कहा गया था:
- सरकारी कार्यों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन के बीच परस्पर संबंध का विश्लेषण आवश्यक है।
- किसी प्रकार के लेनदेन का आरोप तक नहीं है।
- मामला पूरी तरह से सरकारी निर्णय प्रक्रिया पर आधारित है।
घटना का विवरण: तलब और आरोप
11 मार्च 2015 को निचली अदालत के जज भरत पाराशर ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए, 8 अप्रैल 2015 को डॉ. सिंह और अन्य को तलब किया। उस समय, डॉ. सिंह के पास कोयला मंत्रालय का प्रभार भी था।
अदालत ने कहा कि सिंह ने कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता की अध्यक्षता वाली जांच समिति की सिफारिश पर कार्य किया। जज पाराशर ने स्पष्ट किया कि सिंह को यह मानने का कोई कारण नहीं था कि गुप्ता ने खदान आवंटन में किसी गैर-अनुपालन वाली निजी फर्म की सिफारिश की है। गुप्ता को सिंह को गुमराह करने का दोषी पाया गया।
अदालत की टिप्पणियां: प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी और प्रक्रिया
अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि:
- कोयला मंत्रालय का प्रभार अपने पास रखना, मंत्रालय के महत्व को दर्शाता है।
- आवेदनों की पात्रता और पूर्णता की जांच के लिए कोयला मंत्रालय की प्रक्रियाओं पर विश्वास करना स्वाभाविक था।
- फाइल प्रधानमंत्री तक पहुंचने से पहले किसी भी अधिकारी ने प्रक्रिया में त्रुटि की ओर संकेत नहीं किया।
मनमोहन सिंह का दृष्टिकोण और उनकी छवि
डॉ. सिंह ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि उनके निर्णय पारदर्शी और ईमानदारी पर आधारित थे। उन्होंने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वह किसी भी प्रकार के अपराध में शामिल नहीं थे। उनके मामले ने इस सवाल को भी उठाया कि क्या ऐसे वरिष्ठ सार्वजनिक अधिकारियों को बिना पर्याप्त आधार के अदालती कार्यवाही में घसीटा जाना चाहिए।