सऊदी अरब को अमेरिकी F-35 की बिक्री ,एक हथियार सौदा या मिडिल ईस्ट की बदली हुई ताक़त?

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News India Live, Digital Desk: अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ एक बड़ा और ऐतिहासिक हथियार समझौता किया है. [America Saudi Arab F-35 Deal] यह कोई सामान्य बिक्री नहीं है, क्योंकि इसमें दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमान, F-35 भी शामिल हैं. इस खबर के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में चर्चाएं गर्म हो गई हैं कि यह सिर्फ एक खरीद-फरोख्त नहीं है, बल्कि यह मिडिल ईस्ट के सैन्य संबंधों का नया अध्याय शुरू करता है.

अमेरिका की तरफ़ से, इस कदम को मंज़ूरी उस वक्त मिली जब व्हाइट हाउस में पिछली सरकार सत्ता में थी. F-35 एक ‘स्टेल्थ’ फाइटर जेट है, जिसका मतलब है कि इसे रडार पर पकड़ना लगभग असंभव है. [advanced F-35 stealth technology transfer] यह तकनीक किसी भी देश के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, इसीलिए इसे अभी तक केवल गिने-चुने करीबी सहयोगी देशों को ही दिया गया है. सऊदी अरब को इस तरह का सबसे आधुनिक F-35 फाइटर जेट बेचना, अमेरिकी विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव है.

इस बड़े फैसले से जुड़े पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना था कि यह तो अभी शुरुआत है. उनके बयान से साफ़ था कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग का दायरा आने वाले समय में और बढ़ेगा. समझौते में केवल F-35 ही नहीं हैं, बल्कि कई अन्य ‘टॉप-टियर’ यानी शीर्ष-श्रेणी के हथियार और सैन्य उपकरण भी शामिल हैं. [Trump administration weapons sales Saudi Arabia]

अब बात करते हैं इसके प्रभाव की. सऊदी अरब की सैन्य ताकत में इस वृद्धि से क्षेत्र में पहले से मौजूद संतुलन डगमगा सकता है. जानकारों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण तेज़ी से बदलेंगे. यह सौदा केवल F-35 लड़ाकू विमान बिक्री समझौता ही नहीं है, बल्कि सऊदी अरब को अमेरिका की ओर से एक सामरिक भरोसा देने का संदेश भी है. कई विश्लेषक इस समझौते को ट्रंप प्रशासन का सबसे बड़ा हथियार सौदा भी कह रहे हैं, जो आने वाले समय में मध्य-पूर्व की शक्ति को फिर से परिभाषित कर सकता है. इस पूरे घटनाक्रम पर सबकी नज़र रहेगी कि कैसे ये शक्तिशाली विमान क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को प्रभावित करते हैं.