Amanjot Kaur Fielding : वो डायरेक्ट हिट जिसने ऑस्ट्रेलिया को तोड़ा, और वो कैच जिसने भारत को वर्ल्ड चैंपियन बना दिया

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News India Live, Digital Desk : वर्ल्ड कप फ़ाइनल जैसे बड़े मैच में हर खिलाड़ी पर हीरो बनने का दबाव होता है. इस दबाव में कुछ बिखर जाते हैं, तो कुछ ऐसे निखरते हैं कि इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लेते हैं. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए महिला वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में, वह नाम था अमनजोत कौर का. बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी में तो टीम ने शानदार प्रदर्शन किया ही, लेकिन फ़ील्डिंग में अमनजोत ने जो दो बड़े कारनामे किए, उन्होंने मैच का रुख हमेशा के लिए भारत की तरफ मोड़ दिया.

पहला जादू: जब एक 'रॉकेट थ्रो' ने तोड़ दी ऑस्ट्रेलिया की कमर

ऑस्ट्रेलिया की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए धीरे-धीरे मैच में वापसी कर रही थी. एलिसा हीली, जो अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी के लिए जानी जाती हैं, क्रीज़ पर थीं और भारतीय फैंस की धड़कनें बढ़ी हुई थीं. सबको पता था कि अगर हीली कुछ देर और टिक गईं, तो मैच हाथ से फिसल सकता है.

तभी पारी के 14वें ओवर में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी. हीली ने गेंद को मिड-विकेट की तरफ धकेला और तेज़ी से दो रन लेने के लिए दौड़ पड़ीं. वहां फील्डिंग कर रहीं थीं अमनजोत कौर. उन्होंने बिजली की रफ़्तार से गेंद को उठाया और बिना एक पल गँवाए सीधा नॉन-स्ट्राइकर एंड के स्टंप्स पर दे मारा. गेंद सीधा स्टंप्स से जाकर लगी और लाल बत्ती जल उठी. एलिसा हीली रन आउट हो चुकी थीं. यह कोई मामूली रन आउट नहीं था; यह उस साझेदारी का अंत था जो भारत के लिए ख़तरा बन रही थी. इस एक डायरेक्ट हिट ने पूरे ऑस्ट्रेलियाई कैंप में खामोशी ला दी और भारतीय खेमे में एक नई ऊर्जा भर दी.

दूसरा जादू: वो कैच जिसने 140 करोड़ लोगों के सपने को पूरा किया

मैच अब अपने आख़िरी पड़ाव पर था. ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए कुछ रन और चाहिए थे, लेकिन उनके पास सिर्फ़ एक ही विकेट बचा था. स्ट्राइक पर थीं अलाना किंग, जो बड़े शॉट लगाने में माहिर हैं. भारत की जीत और हार के बीच सिर्फ एक विकेट का फासला था.

भारतीय कप्तान ने गेंद राधा यादव को थमाई. ओवर की पांचवीं गेंद पर अलाना किंग ने हवा में एक ज़ोरदार शॉट खेला. एक पल के लिए स्टेडियम में मौजूद हर भारतीय फैन की साँसें रुक गईं. गेंद तेज़ी से लॉन्ग-ऑन बाउंड्री की तरफ जा रही थी और ऐसा लग रहा था कि यह छक्का हो सकता है.

लेकिन वहाँ तैनात थीं अमनजोत कौर. उन्होंने गेंद पर अपनी नज़रें जमाए रखीं, कुछ क़दम पीछे हटीं, सही समय पर उछलीं और गेंद को अपने हाथों में सुरक्षित तरीक़े से लपक लिया.

और बस! इसी कैच के साथ भारत वर्ल्ड चैंपियन बन गया! वो एक कैच सिर्फ़ एक विकेट नहीं था; वो करोड़ों भारतीयों का सपना था जिसे अमनजोत ने अपने हाथों में थाम लिया था. बल्लेबाज़ आए और गए, गेंदबाज़ों ने विकेट लिए, लेकिन फ़ाइनल के उन दो सबसे निर्णायक पलों पर सिर्फ़ एक ही नाम लिखा था - अमनजोत कौर.