तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक (AIADMK) महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बैठक के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले AIADMK और भाजपा के बीच गठबंधन दोबारा हो सकता है।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। पलानीस्वामी ने गृह मंत्री को AIADMK के विचारों और राज्य की स्थिति से अवगत कराया।
2023 में BJP से अलग हुई थी AIADMK
सितंबर 2023 में AIADMK ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था, क्योंकि पार्टी के नेताओं को तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के. अन्नामलाई की आक्रामक राजनीतिक शैली पर आपत्ति थी। इसके बाद, AIADMK के वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा से मुलाकात कर अन्नामलाई के बयानों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
गठबंधन की संभावनाएं क्यों बढ़ीं?
AIADMK के नेताओं ने द्रविड़ नेता सी.एन. अन्नादुरई पर की गई टिप्पणी को लेकर अन्नामलाई से माफी की मांग की थी। हालांकि, हाल ही में अन्नामलाई ने AIADMK की आलोचना को कम कर दिया है, जिससे दोनों पार्टियों के बीच संबंधों में सुधार की संभावना बढ़ गई है।
अगर AIADMK और भाजपा फिर से गठबंधन करते हैं, तो वे तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) नीत इंडिया गठबंधन को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने केंद्र की आलोचना की
दूसरी ओर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मंगलवार को केंद्र सरकार की भाषा नीति और वित्तीय अन्याय को लेकर कड़ा रुख अपनाया। विधानसभा में एक चर्चा के दौरान स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार द्विभाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) पर कायम रहेगी और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
स्टालिन ने कहा, “हम इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए जल्द ही ठोस पहल करेंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषा नीति पर कोई समझौता नहीं होगा।
क्या फिर साथ आएंगे AIADMK-BJP?
पलानीस्वामी और शाह की मुलाकात के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि दोनों दलों के बीच राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। अगर यह गठबंधन फिर से बनता है, तो तमिलनाडु की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।