सुपरपावर के बीच AI वॉर ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात से पहले व्हाइट हाउस का बड़ा हमला
News India Live, Digital Desk: अमेरिका और चीन के बीच चल रहा 'टेक्नोलॉजी वॉर' एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग में होने वाली महत्वपूर्ण मुलाकात से ठीक तीन हफ्ते पहले व्हाइट हाउस ने चीन पर 'इंडस्ट्रियल लेवल' की टेक्नोलॉजी चोरी का सनसनीखेज आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक कड़े मेमो में कहा गया है कि चीनी संस्थाएं बड़े पैमाने पर अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की 'डिजिटल डकैती' कर रही हैं। इस आरोप ने अगले महीने होने वाले शिखर सम्मेलन (14 मई 2026) से पहले वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है।
'डिस्टिलेशन' और 'जेलब्रेकिंग' के जरिए सेंधमारी
व्हाइट हाउस के विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय (OSTP) के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस द्वारा जारी इस मेमो में चीन पर 'डिस्टिलेशन' (Distillation) तकनीक के जरिए अमेरिकी AI मॉडल्स की नकल करने का आरोप लगाया गया है।
क्या है आरोप? चीन हज़ारों प्रॉक्सी अकाउंट्स और 'जेलब्रेकिंग' तकनीकों का इस्तेमाल कर OpenAI और Anthropic जैसे अमेरिकी लैब के गुप्त डेटा को निकाल रहा है।
मकसद: इसके जरिए चीन बेहद कम लागत में ऐसे AI मॉडल्स तैयार कर रहा है जो अमेरिकी मॉडल्स की बराबरी कर सकें। इसे अमेरिकी विशेषज्ञ 'बौद्धिक संपदा की चोरी' मान रहे हैं।
ट्रंप सरकार का 'एक्शन प्लान' तैयार
ट्रंप प्रशासन ने इस 'डिजिटल डकैती' को रोकने के लिए कमर कस ली है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी AI कंपनियों के साथ खुफिया जानकारी साझा करेगा और विदेशी संस्थाओं को जवाबदेह ठहराने के लिए कड़े कदम उठाएगा।
चिप सप्लाई पर संकट: इस नए विवाद के बाद एनवीडिया (Nvidia) के पावरफुल AI चिप्स की चीन को होने वाली सप्लाई पर फिर से तलवार लटक गई है। हालांकि जनवरी में इसे सशर्त मंजूरी मिली थी, लेकिन ताजा आरोपों के बाद अमेरिका इन पर फिर से पाबंदी लगा सकता है।
संसदीय कार्रवाई: अमेरिकी संसद में एक द्विदलीय विधेयक भी पेश किया गया है, जिसके तहत उन विदेशी संस्थाओं पर भारी प्रतिबंध (Sanctions) लगाए जाएंगे जो अमेरिकी AI मॉडल्स के तकनीकी फीचर्स की चोरी करते पकड़े जाएंगे।
चीन ने आरोपों को बताया 'निराधार'
बीजिंग ने अमेरिका के इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने वाशिंगटन के दावों को पूरी तरह 'निराधार' बताते हुए कहा है कि यह चीन की AI उपलब्धियों को बदनाम करने की कोशिश है। चीन का कहना है कि वे अपनी तकनीक और नवाचार (Innovation) के दम पर आगे बढ़ रहे हैं और अमेरिका अपनी बादशाहत खोने के डर से ऐसे आरोप लगा रहा है।
क्या होगा ट्रंप-जिनपिंग बैठक पर असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'टेक वॉर' ने आगामी शिखर सम्मेलन के एजेंडे को बदल दिया है। जहां चीन चाहता था कि अमेरिका सेमीकंडक्टर और एआई पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे, वहीं अब ट्रंप प्रशासन का रुख और कड़ा हो सकता है। 14 मई को बीजिंग में होने वाली यह मुलाकात अब केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली तकनीक—AI पर नियंत्रण की जंग का अखाड़ा बनने वाली है।