
दिल्ली की सत्ता से आम आदमी पार्टी के बाहर होते ही पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार के कई फैसलों की जांच शुरू हो गई है। अब दिल्ली सरकार ने AAP सरकार के कार्यकाल में लगाए गए दो लाख साठ हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच के आदेश दिए हैं। ये कैमरे लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लगाए गए थे। रविवार को इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा की गई।
PWD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने सभी कैमरों का फिजिकल वेरिफिकेशन करने और उनकी कार्यशील स्थिति को लेकर ऑडिट रिपोर्ट मांगी है। हाल ही में दिल्ली विधानसभा में पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा ने कहा था कि यह भी जांच की जाएगी कि AAP सरकार के दौरान उन आठ विधानसभा क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए जहां भारतीय जनता पार्टी के विधायक थे। मंत्री ने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर अब कैमरे लगाए जाएंगे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, PWD ने दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में कुल 2.70 लाख कैमरे लगाने का लक्ष्य रखा था। अब तक 2.63 लाख कैमरे लगाए जा चुके हैं।
इन कैमरों का फिजिकल वेरिफिकेशन इस उद्देश्य से किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी कैमरे सही स्थानों पर लगे हैं, उनकी संख्या कितनी है और वे कार्य कर रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, उनकी इमेज क्वालिटी, कवरेज एरिया और अन्य निगरानी प्रणालियों के साथ उनका समन्वय भी जांचा जाएगा। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य है कि यह देखा जा सके कि ये कैमरे वास्तव में आम जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए कितने उपयोगी हैं।
PWD अधिकारियों के अनुसार, इस ऑडिट कार्य में निजी आईटी कंपनियों की मदद ली जा सकती है। इससे विभाग को परियोजना में आवश्यक सुधार करने में सहायता मिलेगी। ऑडिट में कैमरों की रिकॉर्डिंग, डाटा प्रबंधन, और डाटा सुरक्षा से जुड़ी बातों की भी जांच की जाएगी, ताकि नागरिकों की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जा सके। अनुमान है कि संबंधित आईटी फर्म के चयन के बाद करीब दो महीने में पूरी रिपोर्ट तैयार हो जाएगी।
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