
हिंदू धर्म में किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले शुभ मुहूर्त और तिथि जानना बेहद जरूरी माना जाता है। इसे ही कहते हैं पंचांग देखना—जो न केवल तिथि, नक्षत्र और योग की जानकारी देता है, बल्कि यह भी बताता है कि कौन सा समय आपके लिए शुभ है और किससे बचना चाहिए। अगर आप आज यानी 1 अप्रैल 2025, दिन मंगलवार को किसी खास काम की योजना बना रहे हैं, तो यहां आपको मिलेगा आज के पंचांग का पूरा विवरण। आइए जानते हैं कौन-कौन से समय आपके लिए लाभकारी रहेंगे।
1 अप्रैल 2025 का पंचांग
- दिन: मंगलवार
- विक्रम संवत: 2082
- शक संवत: 1947
- माह: चैत्र
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: चतुर्थी (पूरे दिन)
- चंद्र राशि: मेष (शाम 4:22 तक), फिर वृष
- नक्षत्र: भरणी (सुबह 11:06 तक), फिर कृतिका
- योग: विशकुंभ
- सूर्योदय: सुबह 6:14 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:32 बजे
- चंद्रोदय: –
- चंद्रास्त: –
आज के विशेष योग और मुहूर्त
- सर्वार्थ सिद्धि एवं रवि योग:
सुबह 11:06 बजे से शुरू होकर 2 अप्रैल सुबह 6:13 बजे तक रहेगा। यह समय कोई भी बड़ा निर्णय लेने या नया काम शुरू करने के लिए अत्यंत शुभ है। - अभिजित मुहूर्त:
सुबह 11:40 से 12:30 तक – सभी कार्यों के लिए अत्यंत शुभ समय। - दुष्ट मुहूर्त:
चतुर्थी तिथि में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करना वर्जित होता है। खासतौर पर नए कार्य की शुरुआत इस दिन टाल देना बेहतर होता है।
राहुकाल (अशुभ समय)
- दोपहर 3:27 से 4:59 बजे तक
इस समय के दौरान कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय या कार्य न करें। राहुकाल में यात्रा, लेन-देन और शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है।
दिशा शूल
मंगलवार को उत्तर दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है। यदि यात्रा अत्यंत आवश्यक हो तो घर से निकलते समय थोड़ा गुड़ खाकर और शुभ चौघड़िया देखकर यात्रा प्रारंभ करें।
आज के चौघड़िया मुहूर्त (दिन के समय)
मुहूर्त | समय |
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चर | सुबह 9:18 से 10:50 तक |
लाभ | सुबह 10:50 से दोपहर 12:23 तक |
अमृत | दोपहर 12:23 से 1:55 तक |
शुभ | दोपहर 3:27 से शाम 4:59 तक |
आज रात के चौघड़िया मुहूर्त
मुहूर्त | समय |
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लाभ | रात 7:59 से 9:27 तक |
शुभ | रात 10:54 से 12:22 तक |
अमृत | रात 12:22 से 1:50 तक |
चर | रात 1:50 से 3:17 तक |
चौघड़िया मुहूर्त विशेष रूप से यात्रा और अन्य शुभ कार्यों के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं।
तीज-त्योहार और विशेष आयोजन
- आज कोई प्रमुख व्रत या त्योहार नहीं है।
लेकिन चतुर्थी तिथि होने के कारण गणपति पूजन या मनोकामना पूर्ति हेतु उपासना की जा सकती है, बशर्ते काम वर्जित न हो। - भद्राकाल और पंचक नहीं हैं, इसलिए इनमें कोई रुकावट नहीं है।