Jat-Rajput conflict : BJP में बड़ी फूट? संजीव बालियान के एक बयान से दिल्ली से लेकर यूपी तक हड़कंप
News India Live, Digital Desk: Jat-Rajput conflict : दिल्ली में बीजेपी के दो दिग्गज नेताओं, संजीव बालियान और राजीव प्रताप रूडी के बीच छिड़ी जंग अब एक नया और ज़्यादा गंभीर मोड़ ले चुकी है। जो लड़ाई कुछ दिन पहले तक सिर्फ एक क्लब के चुनाव को लेकर थी, अब उसकी आँच पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जातीय राजनीति तक पहुँच गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने इस बार राजीव प्रताप रूडी पर ऐसा तीखा तंज कसा है, जिसने बीजेपी के अंदरखाने में हलचल पैदा कर दी है।
बालियान का रूडी पर सीधा और व्यंग्यात्मक हमला
संजीव बालियान से जब पश्चिमी यूपी में बीजेपी से राजपूत मतदाताओं की कथित नाराज़गी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसका ठीकरा सीधे-सीधे राजीव प्रताप रूडी पर फोड़ दिया। उन्होंने बेहद व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "मुझे नहीं पता था कि राजीव प्रताप रूडी इतने बड़े नेता बन गए हैं कि वे वेस्ट यूपी के वोटर्स को प्रभावित कर सकते हैं।"
बालियान का यह बयान सिर्फ एक ताना नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। वह इशारों-इशारों में यह कह रहे हैं कि दिल्ली के एक क्लब में हुई मामूली सी बात को जानबूझकर पश्चिमी यूपी में तूल दिया जा रहा है और राजपूत समाज को भड़काने की कोशिश की जा रही है, जिसके पीछे कहीं न कहीं रूडी जैसे नेता हैं।
एक क्लब का चुनाव और यूपी की जातीय राजनीति
यह पूरा विवाद दिल्ली के 'कॉन्स्टीट्यूशन क्लब' के चुनाव से शुरू हुआ था, जहाँ संजीव बालियान ने राजीव प्रताप रूडी पर उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने का आरोप लगाया था। लेकिन अब यह लड़ाई व्यक्तिगत अहं से निकलकर पश्चिमी यूपी के संवेदनशील जाट-राजपूत समीकरणों तक पहुँच गई है।
संजीव बालियान खुद एक बड़े जाट नेता हैं, जबकि राजीव प्रताप रूडी एक प्रमुख राजपूत चेहरे हैं। हाल के चुनावों में पश्चिमी यूपी में राजपूतों की बीजेपी से नाराजगी की खबरें खूब चर्चा में रही हैं। बालियान का आरोप है कि रूडी के साथ हुए उनके विवाद को आधार बनाकर कुछ लोग इस नाराजगी की आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने साफ़ किया कि समाज (राजपूत समाज) उनसे नाराज़ नहीं है और हमेशा उनका समर्थन करता रहा है। उन्होंने कहा, "यह समाज के लोगों का काम नहीं है, यह कुछ नेताओं का काम है जो ऐसी बातें फैला रहे हैं।"
एक ही पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं का इस तरह सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ़ बयान देना ये बताता है कि अंदर ही अंदर तनाव काफी बढ़ चुका है। यह लड़ाई अगर जल्द ही नहीं थमी तो इसका असर पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में उठाना पड़ सकता है।