8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission): टीम ने शुरू किया काम, जानें किन राज्यों के कर्मचारियों को सबसे पहले मिलेगा सैलरी हाइक का तोहफा
नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को मंजूरी मिलने के बाद अब इस पर तेजी से काम शुरू हो गया है। आयोग की टीम ने वेब पोर्टल के जरिए कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों से सुझाव मांगना शुरू कर दिया है। 13 मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र के साथ-साथ कई राज्यों ने भी क्षेत्रीय स्तर पर अपनी टीमों का गठन कर दिया है ताकि सिफारिशें लागू होते ही उन्हें अमली जामा पहनाया जा सके।
हर 10 साल में बदलती है सैलरी की संरचना
भारत में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और जीवन स्तर में सुधार के लिए हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, और अब 2026 में 8वें वेतन आयोग की बारी है।
उद्देश्य: महंगाई के अनुपात में वेतन वृद्धि और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) में संशोधन।
असर: इससे न केवल वर्तमान कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़ेगी, बल्कि पेंशनभोगियों की मासिक पेंशन में भी जबरदस्त उछाल आएगा।
राज्यों में कब और कैसे लागू होगा नया वेतन आयोग?
आमतौर पर केंद्र सरकार की सिफारिशें आने के बाद राज्य सरकारें अपने बजट और वित्तीय स्थिति का आकलन करती हैं। यह जरूरी नहीं कि केंद्र के साथ ही राज्यों में भी वेतन बढ़ जाए, लेकिन कई राज्य इस मामले में काफी सक्रिय रहते हैं।
फिटमेंट फैक्टर का खेल: राज्य सरकारें केंद्र द्वारा सुझाए गए फिटमेंट फैक्टर को आधार मानकर अपने कर्मचारियों की सैलरी संशोधित करती हैं।
बजट का प्रबंधन: जिन राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत है, वे इसे केंद्र के तुरंत बाद या कुछ ही महीनों के भीतर लागू कर देते हैं।
[Image showing government employees discussing pay commission benefits and a salary growth chart]
इन राज्यों में सबसे पहले लागू होने की संभावना
पिछले वेतन आयोगों (6ठे और 7वें) के आंकड़ों और वर्तमान प्रशासनिक सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि निम्नलिखित राज्य बाजी मार सकते हैं:
उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र: इन राज्यों में कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक है और यहां की प्रशासनिक मशीनरी ने क्षेत्रीय टीमों का गठन भी शुरू कर दिया है।
गुजरात व तमिलनाडु: अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति के कारण ये राज्य अक्सर केंद्र के फैसलों को तुरंत लागू करते हैं।
असम: उत्तर-पूर्वी राज्यों में असम सबसे पहले वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए जाना जाता है।
विशेषज्ञों की राय: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में सबसे पहले लाभ मिलने की संभावना इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने से नीतिगत तालमेल बेहतर रहता है।
वेब पोर्टल पर सुझावों की प्रक्रिया शुरू
आयोग ने इस बार प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल पोर्टल का सहारा लिया है। कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लिखित रूप में पोर्टल पर दर्ज कर रहे हैं। मुख्य मांगें फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.68 करने और न्यूनतम वेतन को वर्तमान ₹18,000 से बढ़ाकर ₹26,000 करने की है।