एक साथ संन्यास लेंगे 6 बड़े खिलाड़ी? 90 साल की सबसे बूढ़ी टीम ऑस्ट्रेलिया को मिली दर्दनाक चेतावनी

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News India Live, Digital Desk: ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम इस समय भले ही वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और वनडे वर्ल्ड कप की चैंपियन हो, लेकिन पर्दे के पीछे एक ऐसा संकट खड़ा हो रहा है, जो आने वाले समय में उन्हें बहुत 'दर्द' दे सकता है। डेविड वार्नर का संन्यास तो बस एक शुरुआत थी। असलियत यह है कि आज की ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले 90 सालों में मैदान पर उतरने वाली सबसे 'बूढ़ी' यानी सबसे ज़्यादा उम्र वाली टीम है। इसे लेकर पूर्व क्रिकेटरों और एक्सपर्ट्स ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को एक बड़ी चेतावनी दी है कि वे एक "दर्दनाक बदलाव" (Painful Regeneration) के लिए तैयार रहें।

कितनी 'बूढ़ी' है यह टीम?

आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं। वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ हालिया टेस्ट सीरीज़ में खेलने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम की औसत उम्र 31 साल से ज़्यादा थी। 1930 के दशक के बाद यह पहली बार है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम इतनी ज़्यादा उम्रदराज़ खिलाड़ियों के साथ खेल रही है।

टीम के प्रमुख स्तंभ, जैसे डेविड वार्नर (38), उस्मान ख़्वाजा (38), स्टीव स्मिथ (36), मिचेल स्टार्क (35), जोश हेज़लवुड (34), और कप्तान पैट कमिंस (32), सभी अपने करियर के उस पड़ाव पर हैं, जहाँ संन्यास ज़्यादा दूर नहीं होता।

क्यों है यह चिंता की बात?

क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन सभी अनुभवी खिलाड़ियों का एक साथ या आस-पास संन्यास लेना ऑस्ट्रेलिया के लिए एक बहुत बड़ा खालीपन छोड़ जाएगा, जिसे भरना आसान नहीं होगा।

  • अनुभव की कमी: एक साथ इतने बड़े खिलाड़ियों के जाने से टीम में अनुभव की भारी कमी हो जाएगी।
  • युवा खिलाड़ियों पर दबाव: नए और युवा खिलाड़ियों पर आते ही प्रदर्शन करने का बहुत ज़्यादा दबाव होगा।
  • टीम का संतुलन बिगड़ेगा: एक मजबूत टीम बनाने में सालों लगते हैं। इतने सारे बदलावों से टीम का संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर ग्रेग चैपल ने इस स्थिति को "बेहद दर्दनाक" बताया है। उन्होंने कहा कि एक साथ इतने सीनियर खिलाड़ियों को रिप्लेस करना लगभग नामुमकिन है और ऑस्ट्रेलिया को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।

एशेज़ पर मंडराता संकट

यह संकट अगले साल होने वाली प्रतिष्ठित एशेज़ सीरीज़ से पहले और भी बड़ा दिख रहा है। इंग्लैंड की टीम, जो 'बैज़बॉल' की आक्रामक रणनीति के साथ खेल रही है, युवा और ऊर्जा से भरी हुई है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया को अपने सबसे अनुभवी योद्धाओं के बिना या उनके करियर के आख़िरी पड़ाव पर इंग्लैंड का सामना करना पड़ सकता है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे इन बड़े खिलाड़ियों के रहते हुए ही नए चेहरों को कैसे तैयार करते हैं। यह बदलाव जितना सहज होगा, ऑस्ट्रेलिया के लिए उतना ही अच्छा होगा, वरना उनका भविष्य वाकई 'दर्दनाक' हो सकता है।