काबुल-कंधार में घुसकर मारे 40 आतंकी, अब तालिबान आया लाइन पर? पाकिस्तान ने किया बड़ा दावा
गोलियों की गूंज और बमों के धमाकों के बाद, पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान की सरहद पर अगले 48 घंटों के लिए खामोशी पसर गई है। दोनों देशों के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद एक अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति बन गई है, जो बुधवार शाम 6:30 बजे (भारतीय समयानुसार) से लागू हो गया है।
लेकिन इस खामोशी के पीछे एक बड़ा सवाल छिपा है-आखिर झुका कौन?
पाकिस्तान का दावा: 'गिड़गिड़ाकर' तालिबान ने मांगी शांति!
पाकिस्तान इस युद्धविराम को अपनी बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने ऐलान किया है कि यह सीजफायर "तालिबान के अनुरोध पर" किया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि अफ़गानी तालिबान ने ही लड़ाई रोकने की गुहार लगाई है, जिसके बाद दोनों पक्ष बातचीत के लिए राज़ी हुए।
अफ़गानिस्तान की गहरी चुप्पी
वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे मामले पर अफ़गानिस्तान की तालिबान सरकार ने गहरी चुप्पी साध रखी है। उन्होंने न तो सीजफायर की पुष्टि की है और न ही इस बात पर कोई टिप्पणी की है कि शांति की मांग आखिर किसकी तरफ से की गई।
क्यों ज़रूरी था यह सीजफायर?
यह शांति उस खूनी खेल के बाद आई है जिसमें दोनों तरफ से एक-दूसरे के कई सैनिकों को मारने के बड़े-बड़े दावे किए गए।
- पाकिस्तान का दावा है कि उसने अफ़गानिस्तान के काबुल और कंधार प्रांत में घुसकर "सटीक हमले" किए हैं।
- पाकिस्तानी सेना ने यह भी कहा कि उसने तालिबान के कई हमलों को नाकाम करते हुए 40 से ज़्यादा हमलावरों को मार गिराया, जिसमें एक झड़प में 15-20 तालिबानी आतंकी भी शामिल थे।
इस तनावपूर्ण माहौल के बाद, दोनों पक्ष अगले 48 घंटों तक एक-दूसरे पर गोली नहीं चलाएंगे और बातचीत के ज़रिए इस "जटिल लेकिन सुलझने योग्य" मुद्दे का हल खोजने की कोशिश करेंगे।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह 48 घंटे की शांति दोनों देशों को बातचीत की मेज़ पर ला पाती है, या यह सिर्फ एक बड़े तूफान से पहले की खामोशी है।