Tanvi The Great के 100 दिन करोड़ों की भीड़ वाली फिल्मों के बीच क्यों खास है अनुपम खेर का यह सपना?
News India Live, Digital Desk : हम अक्सर उन फिल्मों की बात करते हैं जो बॉक्स ऑफिस पर 500 या 1000 करोड़ का आंकड़ा पार करती हैं। लेकिन बॉलीवुड में एक तबका ऐसा भी है जो अपनी फिल्मों को 'प्रोजेक्ट' नहीं बल्कि 'जुनून' मानता है। इसी लिस्ट में एक बड़ा नाम जुड़ गया है अनुपम खेर (Anupam Kher) और उनकी अगली निर्देशित फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' (Tanvi The Great) का।
हाल ही में अनुपम खेर ने अपनी इस फिल्म की यात्रा के 100 दिन पूरे होने का जश्न (100 days of Tanvi The Great) मनाया। उन्होंने एक बहुत ही प्यारी और गहरी बात कही है जिसे हर सिनेमा प्रेमी को समझना चाहिए। अनुपम ने साफ़ कहा कि उन्हें उन फिल्मों पर गर्व तो होता है जो खूब पैसा कमाती हैं, लेकिन 'तन्वी द ग्रेट' उनके दिल के एक अलग ही कोने में बसी है।
क्या है यह फिल्म और अनुपम का इमोशन?
अनुपम खेर को हम एक शानदार एक्टर के तौर पर तो जानते ही हैं, लेकिन इस बार वे कैमरे के पीछे से कहानी कह रहे हैं। एक डायरेक्टर के तौर पर यह उनका एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान बिताए गए हर दिन ने उन्हें फिर से कुछ नया सीखने और महसूस करने का मौका दिया।
अनुपम खेर का कहना है कि आज के दौर में जब 'कौमर्शियल हिट' फिल्मों की होड़ लगी है, वहां एक ऐसी फिल्म बनाना जो सीधे लोगों की भावनाओं से जुड़े, अपने आप में एक चुनौती है। उनके लिए 'Tanvi The Great' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि वो सुकून है जिसे उन्होंने बड़े प्यार से संजोया है।
पैसे वाली फिल्में वर्सेस सुकून वाली फिल्में
इस बातचीत में अनुपम खेर ने एक कड़वा लेकिन ज़रूरी सच बोला। उन्होंने माना कि फिल्म इंडस्ट्री में पैसा और बिजनेस बहुत अहमियत रखते हैं, लेकिन सिर्फ पैसे के पीछे भागकर हम उस 'कहानी' की रूह को नहीं बचा सकते जो साफ़-सुथरे जज़्बात पेश करती है। उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि उन्होंने इस फिल्म के ज़रिए वही कहने की कोशिश की है जो वो कहना चाहते थे, बिना किसी बॉक्स ऑफिस के दबाव के।
तन्वी द ग्रेट की अब तक की यात्रा
इस फिल्म के लिए अनुपम ने काफी मेहनत की है। म्यूजिक से लेकर लोकेशन्स तक, हर चीज़ पर उनकी बारीक़ नज़र रही है। हाल ही में फिल्म के कलाकारों और क्रू ने साथ मिलकर 100 दिनों का यह शानदार सफ़र सेलिब्रेट किया। इस मौके पर अनुपम थोड़े भावुक भी नज़र आए, जो उनके इस प्रोजेक्ट के प्रति लगाव को साफ़ बयां करता है।
आगे क्या है उम्मीद?
अनुपम खेर जैसे अनुभवी कलाकार जब कोई कहानी लेकर आते हैं, तो उम्मीदें आसमान पर होती हैं। 'तन्वी द ग्रेट' से यह अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि यह फिल्म दर्शकों को फिर से उस पुराने सिनेमा की याद दिलाएगी जहाँ कहानी की चमक उसके बजट से नहीं बल्कि उसके किरदारों के इमोशंस से होती थी।
आपको क्या लगता है, क्या अनुपम खेर का ये 'जुनून वाला सिनेमा' आज के मार-धाड़ और करोड़ों के बिजनेस वाली फिल्मों के दौर में अपनी अलग जगह बना पाएगा? अपनी राय हमें ज़रूर बताएं।