झारखंड में डिजिटल जनगणना का शंखनाद! बरही और इचाक में प्रगणकों का प्रशिक्षण शुरू, 33 सवालों के साथ घर-घर पहुंचेगी टीम
News India Live, Digital Desk: झारखंड में बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 की प्रक्रिया ने अब रफ्तार पकड़ ली है। भारत सरकार के निर्देशानुसार, राज्य के विभिन्न प्रखंडों में प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) के प्रशिक्षण शिविरों का आगाज हो गया है। हजारीबाग के बरही और इचाक में प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) की देखरेख में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें कागजी कार्रवाई के बजाय मोबाइल ऐप के जरिए डेटा संग्रह पर जोर दिया जाएगा।
33 सवालों का पिटारा: मकान सूचीकरण से होगी शुरुआत जनगणना के पहले चरण में 'मकान सूचीकरण' (House Listing) का कार्य किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रगणकों को बताया जा रहा है कि उन्हें हर घर में जाकर 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछने हैं। इन सवालों में परिवार के सदस्यों की संख्या के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं जैसे—शौचालय की उपलब्धता, पीने के पानी का स्रोत, बिजली, वाहन (दोपहिया/चारपहिया), और घर में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (टीवी, इंटरनेट) की जानकारी शामिल होगी। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर और बुनियादी जरूरतों का सटीक खाका तैयार करना है।
सेल्फ-एन्युमरेशन (स्व-जनगणना) का भी विकल्प झारखंड में पहली बार नागरिकों को स्व-जनगणना (Self-Enumeration) का विकल्प भी दिया जा रहा है।
1 मई से 15 मई 2026: नागरिक एक समर्पित पोर्टल पर लॉग-इन करके स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
16 मई से 14 जून 2026: सरकारी प्रगणक घर-घर जाकर डेटा का मिलान और सत्यापन (Verification) करेंगे। जिन लोगों ने स्व-जनगणना नहीं की होगी, उनका डेटा प्रगणक स्वयं मौके पर दर्ज करेंगे।
प्रशिक्षण में कड़ाई: अनुपस्थित रहने पर होगी कार्रवाई बरही और इचाक के प्रशिक्षण केंद्रों पर चार्ज पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना एक राष्ट्र निर्माण का कार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो प्रगणक या पर्यवेक्षक प्रशिक्षण शिविर में अनुपस्थित रहेंगे, उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। रांची के इटकी और खलारी समेत कई अन्य प्रखंडों में भी इसी तरह के प्रशिक्षण सत्र 7 से 9 मई तक विभिन्न चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया की ओर एक बड़ा कदम इस बार की जनगणना में 'HLO ऐप' का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड होगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि डेटा में मानवीय त्रुटि की संभावना भी कम रहेगी। झारखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के दौरान राज्य की किसी भी प्रशासनिक इकाई या क्षेत्राधिकार की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, ताकि डेटा संग्रहण निर्बाध रूप से पूरा हो सके।