ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी (UH) के कोर्स ‘लिव्ड हिंदू रिलिजन’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय मूल के छात्र वसंत भट्ट ने इस कोर्स में हिंदू धर्म को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। इस पर विश्वविद्यालय ने अकादमिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षक जटिल और चुनौतीपूर्ण विषयों पर विचार करने के लिए स्वतंत्र हैं।
विश्वविद्यालय का बयान
यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन ने एक आधिकारिक बयान में कहा,
“हम अकादमिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं और शिक्षकों को उनके पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता देते हैं। विश्वविद्यालय सामान्य रूप से व्यक्तिगत व्याख्यान की समीक्षा नहीं करता, लेकिन यह सुनिश्चित करता है कि सभी पाठ्यक्रम शैक्षिक मानकों को पूरा करें।”
डीन और धार्मिक अध्ययन विभाग के निदेशक ने इस मुद्दे की समीक्षा की और प्रोफेसर आरोन माइकल उलरी के साथ इस पर चर्चा की। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि यह कोर्स धार्मिक अध्ययन के शैक्षिक अनुशासन पर आधारित है और इसमें विभिन्न धर्मों जैसे ईसाई धर्म, इस्लाम, बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म का विश्लेषण किया जाता है।
क्यों हुआ विवाद?
भारतीय मूल के छात्र वसंत भट्ट ने आरोप लगाया कि कोर्स में हिंदू धर्म को इस्लाम के खिलाफ एक हथियार के रूप में चित्रित किया गया है और इसकी प्राचीनता को नकारने की कोशिश की गई है। उन्होंने कॉलेज ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज के डीन को शिकायत दी, जिसके बाद इस मामले की समीक्षा की जा रही है।
यूनिवर्सिटी का यह सिलेबस ऑनलाइन छात्रों के लिए उपलब्ध है, जिसमें प्रोफेसर आरोन माइकल उलरी के वीडियो लेक्चर साप्ताहिक रूप से दिए जाते हैं। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि शैक्षिक शब्दों का उपयोग सार्वजनिक या राजनीतिक संदर्भ से अलग होता है, जिससे कभी-कभी गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं।
अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय इस विवाद पर कोई और कदम उठाता है या नहीं।