डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क संबंधी धमकियों ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन यहां बाजार में गिरावट की वजह सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले नहीं, बल्कि कई अन्य कारण भी हैं। लाखों छोटे निवेशक विभिन्न कारणों से प्रभावित हुए हैं।
फोमो ने बढ़ाया निवेश का जुनून
कनिष्क (परिवर्तित नाम) ने फोमो (फियर ऑफ मिसिंग आउट) के कारण शेयर बाजार में निवेश करना शुरू किया। महामारी के दौरान सोशल मीडिया पर निवेश से जुड़े विज्ञापन देखने के बाद उन्हें भी तेजी से पैसा कमाने की इच्छा हुई। कनिष्क ने पहले म्यूचुअल फंड में निवेश किया और फिर शेयर बाजार में ट्रेडिंग शुरू की, हालांकि निवेश की बुनियादी जानकारी उन्हें नहीं थी।
महामारी के दौरान शेयर बाजार का उछाल
सलोनी पूज और ईशान शाह की कहानियाँ भी मिलती-जुलती हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने शेयर बाजार में निवेश शुरू किया और शुरुआती दिनों में अच्छा लाभ कमाया। शाह ने बताया कि वे दूसरों की सिफारिशों पर स्टॉक खरीदते थे और अजीब रूप से हमेशा फायदा होता रहा। पूज ने थोड़ी सतर्कता बरती, लेकिन सितंबर 2024 में बाजार के गिरते ही उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।
खुदरा निवेशकों का बाजार में उभार
कोविड-19 के बाद भारतीय शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की संख्या बढ़ी। 2020 के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता ने बाजार में निवेश को आसान बना दिया। मार्च 2020 से मार्च 2024 तक, भारत में पंजीकृत निवेशकों की संख्या तीन गुना बढ़कर 9.2 करोड़ हो गई।
बाजार में गिरावट के कारण
सितंबर 2024 के बाद से भारतीय शेयर बाजारों में 1.2 लाख करोड़ डॉलर की गिरावट आई। निफ्टी 50 इंडेक्स अपने उच्चतम स्तर से 16% नीचे आ गया। इसका प्रमुख कारण कॉरपोरेट कंपनियों का बढ़ता मूल्यांकन और उनकी घटती आय थी। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों ने भारत से पूंजी निकालकर चीन जैसे अन्य बाजारों में लगाई, जिससे बाजार में गिरावट आई।
छोटे निवेशकों के लिए सबक
कनिष्क, शाह और पूज जैसे निवेशकों ने पिछले महीनों में कठिन समय देखा है। अब वे अधिक सतर्क हो गए हैं और सोशल मीडिया के निवेश संबंधी सुझावों पर भरोसा नहीं कर रहे। शाह ने ट्रेडिंग छोड़ दी, जबकि पूज ने जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना शुरू किया।
ट्रंप की नीतियों का प्रभाव
ट्रंप द्वारा भारत पर शुल्क लगाने की धमकी से बाजार में अस्थिरता आई। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे भारत के लिए सुधार का अवसर मानते हैं। निवेशक अब अधिक सतर्कता बरत रहे हैं और दीर्घकालिक रणनीतियों पर ध्यान दे रहे हैं।