भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट पम्बन ब्रिज बनकर तैयार हो गया है और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 अप्रैल को रामनवमी के दिन करेंगे। समुद्र पर बना 2.08 किलोमीटर लंबा यह पुल रामेश्वरम द्वीप को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ता है। यह रेलवे ट्रैक के साथ एक ऊर्ध्वाधर लिफ्ट वाला समुद्री पुल है, जिस पर ट्रेनें भी चल सकती हैं और इसके नीचे से जहाज भी गुजर सकते हैं।
ऐसे काम करता है पम्बन ब्रिज
समुद्री यातायात को सुविधाजनक बनाने के लिए, पुल पर रेलवे ट्रैक के एक हिस्से को 17 मीटर ऊंचा कर दिया गया ताकि जहाज नीचे से गुजर सकें। यह पुल ब्रिटिश शासन के दौरान बने लगभग 110 साल पुराने पम्बन पुल के समानांतर बनाया गया है। कई दशक पहले बना यह हेरिटेज पुल अब जंग लगने के कारण उपयोग के लायक नहीं है। इसलिए इसे बंद कर दिया गया।
रेलवे ने इस पुल का निर्माण करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से किया है। 531 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पुल समुद्री यातायात और रेल संपर्क का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। साथ ही, यह पुल अद्भुत इंजीनियरिंग का उदाहरण है, क्योंकि यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट पुल है। इसका मतलब यह है कि इसका केंद्रीय भाग 17 मीटर तक उठाया जा सकता है, जिससे बड़े जहाज पुल के नीचे से गुजर सकेंगे।
मजबूत डिजाइन और बेजोड़ निर्माण
नए पम्बन ब्रिज के झूले को खोलने में 5 मिनट 30 सेकंड का समय लगता है, जबकि पुराने ब्रिज के झूले को खोलने में 35 मिनट से 40 मिनट का समय लगता है। अब नये पुल के निर्माण से समय की काफी बचत होगी। उच्च गुणवत्ता और प्रौद्योगिकी की मदद से निर्मित इस पुल को अशांत समुद्री परिस्थितियों और तेज हवाओं का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।
यदि हवा की गति 58 किमी प्रति घंटे से अधिक हो जाए तो ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही रुक जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह पुल 100 वर्षों से अधिक समय तक टिकेगा। इस पुल को स्टेनलेस स्टील का उपयोग करके बनाया गया है, जो इसे और अधिक क्षति से बचाता है।
पुल पर चढ़ने वाले लिफ्ट गर्डर का वजन 660 मीट्रिक टन है और इसे 80 किमी/घंटा की रेल गति के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस ट्रैक पर ट्रेनों की स्वीकृत गति 75 किमी प्रति घंटा है। इसका मतलब यह है कि पुल से गुजरने वाली ट्रेनें कम गति से गुजर सकेंगी। इस पुल से रामेश्वर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ जाएंगी।