बच्चों की सही परवरिश करना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है, खासकर जब बात बेटियों की हो। समाज की बदलती सोच और समय के साथ पेरेंटिंग के तरीके भी बदलते रहते हैं। ऐसे में माता-पिता को न सिर्फ अपने व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए बल्कि यह भी देखना चाहिए कि वे अपनी बेटियों से क्या कह रहे हैं। कई बार हम अनजाने में ऐसी बातें बोल देते हैं जो बेटियों के आत्मविश्वास को कम कर सकती हैं और उनके मन में नकारात्मक प्रभाव छोड़ सकती हैं। आइए जानते हैं वे कौन-सी बातें हैं जिन्हें माता-पिता को अपनी बेटियों से कहने से बचना चाहिए।
1. बार-बार बेटे से तुलना करना
बेटा हो या बेटी, दोनों की अपनी अहमियत होती है। बेटियों की उनके भाइयों से तुलना करना उन्हें हीनभावना से भर सकता है। जब बच्चियों को बार-बार यह सुनने को मिलता है कि वे अपने भाई की तरह क्यों नहीं हैं, तो इससे उनका आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है। इसलिए बच्चों की तुलना करने के बजाय उनकी अलग-अलग खूबियों को सराहें।
2. “बेटी हो तो घर के काम सीखो”
अक्सर बेटियों से कहा जाता है कि उन्हें घर के काम आना ही चाहिए। लेकिन यह सोच बेटियों के मन में यह धारणा बना सकती है कि उनका मुख्य दायित्व केवल घर संभालना है। घर के काम केवल बेटियों की ही जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि यह एक ज़रूरी जीवन कौशल है जो बेटा हो या बेटी, सभी को आना चाहिए।
3. “लड़कियों की तरह रहना सीखो”
बढ़ती उम्र की लड़कियों को कई बार यह सुनने को मिलता है कि उन्हें “लड़कियों की तरह” रहना चाहिए। यह बात उन्हें आत्म-संदेह से भर सकती है और उनकी निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर सकती है। लड़कियों को उनकी पसंद और रुचियों के अनुसार बढ़ने का अवसर देना चाहिए, न कि उन्हें किसी खास ढांचे में ढालने की कोशिश करनी चाहिए।
4. “लड़की हो तो बर्दाश्त करना सीखो”
कई घरों में लड़कियों को यह सिखाया जाता है कि उन्हें हर बात को सहना चाहिए, चाहे उनके साथ कुछ गलत ही क्यों न हो रहा हो। यह सोच गलत है। बेटियों को सिखाएं कि वे अपनी बात बेझिझक कह सकें और अगर उनके साथ कुछ अनुचित हो रहा है तो वे उसके खिलाफ आवाज उठा सकें।
5. “लड़कियां तो पराया धन होती हैं”
अक्सर बेटियों को यह सुनने को मिलता है कि वे “पराया धन” हैं और उन्हें एक दिन अपने मायके को छोड़कर ससुराल जाना होगा। यह बात उनके मन में यह भावना बैठा सकती है कि वे अपने ही घर में पराई हैं। इसके बजाय, उन्हें यह महसूस कराएं कि वे आपके परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगी।