
पिछले कुछ दिनों से एशिया के कई देशों में भूकंप के झटकों ने दहशत फैला दी है। जहां एक ओर म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप ने अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली, वहीं पाकिस्तान और थाईलैंड में भी धरती की कंपकंपी से लोग सहमे हुए हैं। ताजा घटना में पाकिस्तान में 2 अप्रैल की रात 3 बजे के करीब एक और झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 4.3 रिक्टर स्केल पर दर्ज की गई।
हालांकि, राहत की बात ये रही कि इस झटके में अब तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों के बीच डर का माहौल अब भी बना हुआ है।
म्यांमार में तबाही का मंजर – 2000 से ज्यादा मौतें
म्यांमार में आया हालिया भूकंप अब तक का सबसे भयावह साबित हो रहा है। यहां मौतों का आंकड़ा 2000 के पार पहुंच चुका है और सैकड़ों लोग घायल हैं या लापता हैं। रेस्क्यू ऑपरेशंस जारी हैं, लेकिन लगातार आफ्टरशॉक्स की वजह से राहत कार्यों में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
म्यांमार के कई इलाकों में इमारतें ध्वस्त हो गई हैं, सड़कें टूट गई हैं और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप हो गई हैं। यह आपदा एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने तकनीक और संसाधन भी कितने लाचार हो जाते हैं।
पाकिस्तान में भी कांपी ज़मीन, बलूचिस्तान रहा केंद्र
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक, पाकिस्तान में आया भूकंप बलूचिस्तान से 65 किलोमीटर दूर पूर्व-दक्षिणपूर्व दिशा में 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। यह क्षेत्र पहले से ही भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।
पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा हिंदू कुश, तिब्बत और हिमालय की टेक्टोनिक प्लेट्स के मिलन बिंदु पर स्थित है, जो इसे भूकंप के लिहाज़ से खतरनाक बनाता है। यही वजह है कि यहां छोटे-बड़े भूकंप नियमित रूप से आते रहते हैं।
ईद के दिन कराची भी हिला – 4.7 तीव्रता दर्ज
इसी साल ईद के मौके पर भी पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में धरती हिली थी। इस भूकंप की तीव्रता 4.7 मापी गई, जबकि USGS के अनुसार यह 4.6 थी। इसका केंद्र शहर से 75 किलोमीटर उत्तर में स्थित था। इस झटके ने त्योहार के दिन लोगों को डरा दिया और कई लोग खुले स्थानों की ओर दौड़ते नजर आए।
फरवरी में भी लगे थे झटके, लगातार बढ़ रही है चिंता
इससे पहले 28 फरवरी को भी पाकिस्तान में भूकंप महसूस किया गया था जिसकी तीव्रता 4.5 रिक्टर स्केल पर थी। यह झटका इतना तीव्र नहीं था, लेकिन इसके कुछ दिन पहले 16 फरवरी को भी भूकंप आया था जिसका केंद्र रावलपिंडी के पास था और गहराई 17 किलोमीटर थी। इन झटकों का असर पाक अधिकृत कश्मीर तक महसूस किया गया था।
लगातार आ रहे इन भूकंपों ने पाकिस्तान में भूकंप अलर्ट और तैयारियों को लेकर नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है।
क्या कहता है विशेषज्ञों का नजरिया?
भूकंप वैज्ञानिकों का मानना है कि एशियाई प्लेटों की टेक्टोनिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, और यह आने वाले समय में और गंभीर हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर शहरों की प्लानिंग और आपदा प्रबंधन को मजबूत नहीं किया गया, तो आगे नुकसान और भी ज्यादा भयावह हो सकता है।