नक्सलवाद के खात्मे की अंतिम रणनीति तैयार, अमित शाह का दंतेवाड़ा दौरा तय

नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम प्रहार की रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार हालात की निगरानी कर रहा है। केंद्र सरकार की तय समयसीमा के भीतर नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए उच्च स्तर पर अंतिम रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह अप्रैल के पहले हफ्ते में दंतेवाड़ा का दौरा कर सकते हैं। संभावित तारीख 4 या 5 अप्रैल मानी जा रही है। साढ़े तीन महीने के भीतर यह दूसरी बार शाह का नक्सली गढ़ में दौरा है, जो सुरक्षा रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

नक्सल विरोधी अभियान की समीक्षा करेंगे अमित शाह

गृह मंत्री अभियान की जमीनी हकीकत की समीक्षा करने के साथ-साथ नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम लड़ाई की दिशा तय करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,
“नक्सलियों के वित्तीय स्रोतों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, हथियार आपूर्ति की चेन भी टूट चुकी है। अब उनके बचे-खुचे संसाधनों को खत्म करने का अभियान जारी है।”

सूत्रों के अनुसार, यदि मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण अंत करना है, तो अक्टूबर 2025 तक नक्सली हिंसा को जीरो पर लाना होगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर ऑपरेशन को तय समय सीमा से पहले खत्म करना चाहती हैं।

नक्सली इलाकों में बढ़ता सुरक्षा बलों का प्रभुत्व

  • सुरक्षा बलों ने नक्सली गढ़ों में कैंप स्थापित कर विकास योजनाओं को लागू करना शुरू कर दिया है।

  • हैलीपैड, सड़कें, आधुनिक हथियारों से लैस ऑपरेशन कैंप, ड्रोन तकनीक से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है।

  • अबूझमाड़ समेत कई घने जंगलों में सुरक्षा बलों का पूरा प्रभाव स्थापित हो चुका है।

नक्सलियों में बढ़ता खौफ

बीजापुर में हुए एनकाउंटर के बाद सुरक्षा बलों को नक्सलियों का पत्र मिला है, जो गोंडी भाषा में लिखा गया था। इसमें बताया गया कि नक्सलियों के सेफ जोन रहे बोडका, गमपुर, डोडीतुमनार और तोड़का के जंगल भी अब सुरक्षित नहीं हैं।

  • पिछले एक साल में:

    • 380 नक्सली मारे गए

    • 1194 नक्सली गिरफ्तार

    • 1045 ने आत्मसमर्पण किया

अमित शाह जवानों से कर सकते हैं मुलाकात

दंतेवाड़ा दौरे के दौरान गृह मंत्री आदिवासी सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पंडुम’ के समापन समारोह में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, नक्सली मुठभेड़ों में शामिल जवानों से भी बातचीत कर सकते हैं।

सरकार का फोकस सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आम लोगों का भरोसा जीतकर उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाने पर भी है।