दिल्ली प्रदूषण पर सीएजी रिपोर्ट आज विधानसभा में पेश करेगी सरकार

दिल्ली प्रदूषण पर सीएजी रिपोर्ट आज विधानसभा में पेश करेगी सरकार
दिल्ली प्रदूषण पर सीएजी रिपोर्ट आज विधानसभा में पेश करेगी सरकार

दिल्ली सरकार मंगलवार को विधानसभा में प्रदूषण से जुड़े मामलों पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश करने जा रही है। इससे पहले सरकार आबकारी नीति और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी सीएजी की रिपोर्टें विधानसभा में पेश कर चुकी है, जिनमें कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

ऐसा माना जा रहा है कि प्रदूषण पर आने वाली इस रिपोर्ट के आधार पर भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी की सरकार को घेर सकती है। सर्दियों के मौसम में दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर से लेकर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है। ऐसे में यह रिपोर्ट इस बात का आकलन करेगी कि केजरीवाल सरकार ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए जो कदम उठाए, वे कितने प्रभावी रहे।

दिल्ली विधानसभा का सत्र इन दिनों जारी है, और इसमें सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लगभग एक लाख करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया है।

सीएजी रिपोर्ट पर दो दिनों तक चर्चा

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जानकारी दी कि मंगलवार को सीएजी की लंबित रिपोर्ट को सदन में पेश किया जाएगा। यह इस सत्र की छठी रिपोर्ट होगी। दो रिपोर्टें पहले ही पेश की जा चुकी हैं। नई रिपोर्ट पर अगले दो दिनों तक चर्चा की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जिन विभागों पर सीएजी ने सवाल उठाए हैं, उन्होंने अब तक क्या कार्रवाई की है। विधानसभा को इस बात का अधिकार है कि वह वित्तीय नुकसान और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में आवश्यक निर्णय ले सके।

शराब नीति और स्वास्थ्य योजनाओं पर पहले ही उठे सवाल

इससे पहले पेश की गई सीएजी रिपोर्ट में दिल्ली की नई शराब नीति से हुए राजस्व नुकसान का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अब रद्द हो चुकी नीति के कारण सरकार को करीब 2,026 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, दूसरी रिपोर्ट में मोहल्ला क्लीनिक और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं में फंड के सही उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।

नियमों के पालन में बड़ी चूक

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि आबकारी नीति और शराब वितरण से जुड़े नियमों के क्रियान्वयन में गंभीर कमियां रहीं। रिपोर्ट में कहा गया कि नीतियों को लागू करते समय पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली आबकारी नियम 2010 के नियम 35 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी एक व्यक्ति या कंपनी को एक साथ थोक, खुदरा और होटल-रेस्तरां जैसे अलग-अलग प्रकार के लाइसेंस नहीं दिए जा सकते। लेकिन जांच में पाया गया कि कुछ कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए एक साथ कई प्रकार के लाइसेंस जारी कर दिए गए।

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