चैत्र नवरात्रि 2025: द्वितीय दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व, मंत्र, स्तोत्र और कवच

चैत्र नवरात्रि 2025: द्वितीय दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व, मंत्र, स्तोत्र और कवच
चैत्र नवरात्रि 2025: द्वितीय दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व, मंत्र, स्तोत्र और कवच

चैत्र नवरात्रि देवी दुर्गा की आराधना का विशेष पर्व है, जिसमें नौ दिनों तक उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह रूप ज्ञान, तप और संयम का प्रतीक है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखकर मां ब्रह्मचारिणी की श्रद्धा से पूजा करने से भक्त को जीवन में संयम, विवेक और आत्मबल प्राप्त होता है।

इस दिन किए गए जप, ध्यान और स्तोत्र पाठ से व्यक्ति को आत्मिक शांति, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानें मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र, स्तोत्र और कवच पाठ के बारे में।


मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

दधाना कर-पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

यह मंत्र मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। इसका जप ध्यानपूर्वक करने से साधक को संयम, ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


मां ब्रह्मचारिणी स्तोत्र

तपश्चारिणी त्वं हि तापत्रय निवारिणीम्।
ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

शंकरप्रिया त्वं हि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

इस स्तोत्र का पाठ साधक को मानसिक शांति देता है और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है।


मां ब्रह्मचारिणी कवच स्तोत्र

त्रिपुरा में हृदयं पातु, ललाटे पातु शंकरभामिनी।
अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥

पंचदशी कण्ठे पातु, मध्यदेशे पातु महेश्वरी॥
षोडशी सदापातु, नाभो गृहो च पादयो।
अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी॥

कवच स्तोत्र का पाठ नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा, मानसिक तनाव से मुक्ति और पारिवारिक सुरक्षा का साधन माना गया है। यह पाठ विशेष रूप से तब लाभकारी होता है जब व्यक्ति जीवन में किसी संकट या अनिश्चितता से गुजर रहा हो।

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