
पड़ोसी देश पाकिस्तान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन इसके बावजूद वहां की सरकार और प्रशासन की प्राथमिकताएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। खासकर वहां के हिंदू, सिख, ईसाई और अहमदिया जैसे अल्पसंख्यक समुदाय लगातार अत्याचारों का सामना कर रहे हैं। भारत ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर न सिर्फ इनका विरोध जताया है, बल्कि इन्हें विश्व समुदाय के सामने मजबूती से रखा है।
जयशंकर का संसद में बयान: भारत कर रहा बारीकी से निगरानी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान स्पष्ट किया कि भारत पाकिस्तान में हो रहे अल्पसंख्यकों पर अत्याचार पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया गया है ताकि वैश्विक स्तर पर इस पर ध्यान आकर्षित किया जा सके।
उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार पर बहुत बारीकी से नजर रखते हैं। सिर्फ फरवरी महीने में ही हिंदू समुदाय के खिलाफ़ अत्याचार के 10 मामले सामने आए हैं। इनमें से सात मामले अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन से संबंधित थे, दो मामले सीधे किडनैपिंग से जुड़े थे और एक मामला होली मना रहे छात्रों पर की गई पुलिस कार्रवाई से संबंधित था।”
सिख, अहमदिया और ईसाई समुदायों के खिलाफ भी अत्याचार
विदेश मंत्री ने अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हो रही हिंसक घटनाओं का भी विस्तृत ब्यौरा लोकसभा में दिया। उन्होंने बताया कि सिख समुदाय के खिलाफ भी तीन गंभीर घटनाएं सामने आईं। एक में सिख परिवार पर हमला किया गया, दूसरे में एक गुरुद्वारे को फिर से खोलने के प्रयास पर धमकियां दी गईं और तीसरे में एक सिख लड़की के साथ अपहरण और जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आया।
अहमदिया समुदाय को लेकर उन्होंने बताया कि एक घटना में अहमदिया मस्जिद को सील किया गया और दूसरी में 40 कब्रों को अपवित्र कर दिया गया। ईसाई समुदाय के खिलाफ भी गंभीर मामला सामने आया, जिसमें एक मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख
एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड की कड़ी आलोचना की है। भारत के प्रतिनिधि ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां “मानवाधिकारों का हनन, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यवस्थित क्षरण उसकी नीतियों का हिस्सा बन चुका है।”
उन्होंने पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगाया कि वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों को पनाह देता है और उसे दूसरों को उपदेश देने की कोई नैतिक स्थिति नहीं है। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर आरोप लगाने की बजाय अपने लोगों को शासन, न्याय और समानता देने पर ध्यान देना चाहिए।