आईएएस अधिकारी सुजाता कार्तिकेयन ने लिया ऐच्छिक सेवानिवृत्ति, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में रहा अहम योगदान

ओडिशा कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुजाता कार्तिकेयन ने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है, जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। सुजाता, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी आईएएस अधिकारी वीके पांडियन की पत्नी हैं। अपने प्रशासनिक कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा और खेल नीति में बड़े बदलावों के साथ-साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में उल्लेखनीय कार्य किए।

शिक्षा और खेल में ऐतिहासिक योगदान

सुजाता कार्तिकेयन 2000 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में पोस्ट ग्रैजुएशन किया था। वह लेडी श्रीराम कॉलेज की टॉपर रही हैं और आईएएस अकादमी में गोल्ड मेडलिस्ट थीं।

सुंदरगढ़ जिले की कलेक्टर रहते हुए उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्राओं को साइकिल योजना शुरू करवाई, जिससे लड़कियों की स्कूल में उपस्थिति में भारी वृद्धि हुई। उन्होंने मिड-डे मील में अंडे शामिल करवाने का भी प्रयास किया, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हुआ।

खेल को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने हिंसा प्रभावित इलाकों में फुटबॉल और हॉकी को प्रमोट किया। उनके प्रयासों से हॉकी खेलने वाले लड़कों और लड़कियों के लिए विशेष हॉस्टल बनाए गए, जिससे ओडिशा खेल के क्षेत्र में एक प्रमुख राज्य के रूप में उभरा।

प्रशासनिक सफर और सामाजिक प्रभाव

सुजाता कार्तिकेयन ने कटक जिले की पहली महिला कलेक्टर के रूप में कार्य किया। उन्होंने पटनायक सरकार के मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा, जिससे महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ।

उन्होंने पांच महीने तक संस्कृति सचिव के रूप में भी कार्य किया और राज्य के सांस्कृतिक विकास में योगदान दिया।

राजनीतिक विवाद और वीआरएस का निर्णय

चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने सुजाता कार्तिकेयन का ट्रांसफर कर दिया था, और बीजेपी ने उन पर बीजेडी के करीबी होने का आरोप लगाया। 2024 के आम चुनावों में बीजेडी की हार के बाद, उनके पति वीके पांडियन ने भी राजनीति से संन्यास ले लिया। सुजाता ने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए छह महीने की छुट्टी ली और अंततः वीआरएस का आवेदन दिया, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।