योगिनी एकादशी : योगिनी एकादशी के व्रत से मिलेगा बड़ा फल, जानिए कौन से अनुष्ठान से विष्णु प्रसन्न होंगे?

हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है । हर महीने दो एकादशी आती हैं। एक सूद पार्टी में और दूसरी वाड पार्टी में। गुजराती कलैण्डर के अनुसार जेठ मास के वाद पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी कहते हैं। जैसा कि शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी का व्रत करने से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। और अंत में जीवन मोक्ष को प्राप्त होता है। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। योगी की एकादशी की महानता का वर्णन स्वयं भगवान कृष्ण ने भी किया है। अंदर आओ, एक नज़र डालें और आनंद लें!

योगिनी एकादशी का महत्व

योगिनी एकादशी का अभ्यास करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है। यह व्रत तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। स्वयं भगवान कृष्ण ने इस व्रत का महत्व जानते हुए कहा है कि जो व्यक्ति योगिनी एकादशी का पालन करता है, उसे हजारों ब्राह्मणों को खिलाने का समान पुण्य प्राप्त होता है। वही रूडो अवसर शुक्रवार 24 जून को प्राप्त हुआ। तो आइए जानते हैं किस अनुष्ठान से आज के दिन भगवान विष्णु का सुख प्राप्त किया जा सकता है।

योगिनी एकादशी व्रत और उसकी पूजा विधि

सात्विक भोजन योगिनी एकादशी के व्रत के एक दिन पहले शाम को करें।

एकादशी तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः उठकर स्नान का कार्य पूर्ण कर पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें।

⦁ अब हाथ में अक्षत, जल और पुष्प लेकर योगिनी एकादशी का व्रत व पूजन करने का संकल्प लें।

शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को बाजथ पर रखें। फिर इसे पंचामृत से स्नान कराएं।

फिर श्रीहरि का श्रृंगार करें। भगवान को पीले वस्त्र, पीले फूल, फल, फूल, चंदन, धूप, दीपक, अक्षत, चीनी, हल्दी, तुलसी के पत्ते, नागरवेल के पत्ते और सुपारी अर्पित करें।

इस काम के दौरान। Om नमो भगवते वासुदेवाय नमः। मंत्र का जाप करते रहें। फिर विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। योगिनी एकादशी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।

अंत में भगवान विष्णु की आरती घी के दीपक या कपूर से करें।

प्रार्थना करें कि भगवान विष्णु आपकी मनोकामना पूर्ण करें।

दिन भर फल खाएं। भजन-कीर्तन करें, शाम को श्रीहरि विष्णु की आरती कर रात को जागें।

अगली सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि क्रिया को पूरा करके भगवान विष्णु की पूजा करें।

किसी भी ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र, फल दान करें और यथासम्भव दक्षिणा दें।

फिर सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में योगी की एकादशी का व्रत करें। यदि इस तरह से पूजा की जाती है, तो आपको निश्चित रूप से भगवान विष्णु का सुख प्राप्त होगा।

Check Also

विदेश यात्राएं करते हैं शनि-राहु, जानिए आपकी कुंडली में छिपा है विदेश यात्रा का राज…

विदेश जाने का सपना बहुत से लोगों का होता है लेकिन हर किसी की इच्छा …