World Food Day 2020: जानें कब और कैसे हुई थी इस दिन को मनाने की शुरूआत और इस बार का थीम

भारत वह देश है जहां अन्न को देवता का दर्जा मिला है। ऐसे में इसे बर्बाद करना और फेंकना तो जैसे देवता का अपमान है। हमारे संस्कारों और संस्कृति में सबको खाना पहुंचाने पर आशीर्वाद जो दिया गया है। तभी तो भारतीय संस्कृति में खाने के पहले काक, स्वान और गौ को भोग के नाम पर खाने का कुछ अंश निकाला जाता है। हमारे ऋषि मुनियों ने भी कहा है कि साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम्ब समाए, मैं भी भूखा न रहूं, साधु भी न भूखा जाए। कहने का मतलब है कि हे प्रभु, प्रार्थना है कि इतना खाना हमें दे कि हम तो भूखे न रहें और साथ में ही हमारे कुटुंब, समाज और साधु भी हमारे दरवाजे से भूखा न जाए।

कब हुई थी इस दिन को मनाने की शुरुआत

खाद्य और कृषि संगठन के सदस्य देशों ने नवंबर 1979 में 20वें महासम्मेलन में विश्व खाद्य दिवस की स्थापना की और 16 अक्टूबर 1981 को विश्व खाद्य दिवस मनाने की शुरुआत हुई। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 5 दिसंबर 1980 को इस निर्णय की पुष्टि की गई और सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय संगठनों से विश्व खाद्य दिवस मनाने में योगदान देने का आग्रह किया। तो 1981 से ही विश्व खाद्य दिवस हर साल आयोजित किया जाने लगा।

 

वर्ल्ड फूड डे 2020 की थीम

इस साल कोविड-19 महामारी के असर ने दुनिया भर को प्रभावित किया है। वर्ल्ड फूड डे ने इस साल वैश्विक एकजुटता के लिए सबसे कमजोर लोगों को ठीक करने और खाद्य प्रणालियों को उनके लिए ज्यादा टिकाऊ बनाने में मदद करने का आह्वान किया है। जिससे लोगों को ज्यादा से ज्यादा ऐसे फूड्स के बारे में जानकारी दी जा सके, जो उनके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हों।

 

भारत में कैसे मनाते हैं वर्ल्ड फूड डे?

भारत में यह दिन कृषि के महत्व को दर्शाता है और इस पर जोर देता है कि भारतीयों द्वारा उत्पादित और उपभोग किए जाने वाला भोजन सुरक्षित और स्वस्थ है। भारत में लोग इस अवसर को रंगोली बनाकर और सड़क पर नुक्कड़-नाटक करके लोगों को फूड के बारे में जागरुक करते हैं और इस दिन को मनाते हैं।

Check Also

छाप तिलक सब छीनी रे मो से नैना मिलाके रे…

जनजातीय संग्रहालय में मो. साजिद और आमिर हफीज ने दी सूफियाना प्रस्तुति। जनजातीय संग्रहालय में …