क्या निवेशकों को रिटर्न देने में अगला टाटा टेलीसर्विसेज बनेगा VODA-IDEA? एक साल में दिया 3,000% का बंपर रिटर्न

नई दिल्ली। कर्ज में डूबी कंपनी आइडिया में सरकार को 35.8% शेयर हिस्सेदारी देने के फैसले के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या अगला टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र (टीटीएमएल) बनेगा वोडाफोन-आइडिया? इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि बीते साल टाटा ग्रुप की कंपनी टीटीएमएल में 9.5 फीसदी हिस्सेदारी लेने के बाद से कंपनी के शेयरों में 3,000% से अधिक का उछाल आया है। टाटा टेलीसर्विसेज में भी सरकार ने 850 करोड़ रुपये एजीआर बकाए के एवज में हिस्सेदारी ली थी। ठीक उसी तरह सरकार ने वोडाफोन आइडिया (वीआईएल) पर करीब 16,000 करोड़ रुपये बकाये के एवज में करीब 36 प्रतिशत हिस्सेदारी ली है।  ऐसे में क्या आइडिया के शेयरों में रैली आएगी? आइए जानते हैं शेयर बाजार विशेषज्ञों की इस पर क्या है राय।

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टाटा टेलीसर्विसेज Vs आइडिया

मार्केट एक्सपर्ट कुणाल सरावगी ने इंडिया टीवी को बताया कि टाटा टेलीसर्विसेज से अभी आइडिया के शेयरों की तुलना करना जल्दबाजी होगा। इसकी वजह यह है कि टाटा टेलीसर्विसेज के शेयरों में जोरादार तेजी बिजनेस रिस्ट्रक्चरिंग की वजह से है। टाटा ग्रुप ने टीटीएमएल बैनर तले अपनी सभी ई—कॉमर्स बिजनेस को लेकर आ रही है। आने वाले दिनों में टीटीएमएल के तहत टाटा—क्लिक, बिग बास्केट समेत तमाम ई—कॉमर्स बिजनेस को लाने की तैयारी में है। इसलिए कंपनी के शेयरों में जोरदार तेजी है। ऐसी कोई खबर वोडाफोन-आइडिया के साथ नहीं है। हां, यह जरूर है कि अब आइडिया पर से संकट के बादल छट गए हैं। इसका फायदा कंपनी के शेयरों को निश्चित मिलेगा। आने वाले दिनों में कंपनी के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है।

लंबी अवधि के लिए दांव लगाएं 

मार्केट एक्सपर्ट सिमी भौमिक ने बताया कि वोडाफोन-आइडिया के शेयरों में निवेशक लंबी अवधि के लिए पैसा लगा सकते हैं। कम से कम छह महीने के नजरिये से निवेश करना बेहतर होगा। छह महीने में वोडाफोन-आइडिया के शेयर 18 से 20 रुपये के स्तर को छू सकता है। यानी 50% की रैली देखने को मिल सकती है। वहीं, अगले एक से दो साल की अवधि में और जोरदार रिटर्न मिल सकता है। अगर, छोटे निवेशक पैसा लगाना चाहते हैं कि लंबी अवधि के लक्ष्य को रखकर ही निवेश करें।

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निवेशकों को अब डरने की जरूरत नहीं 

आईआईएफएल सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा कि अब वोडाफोन-आइडिया के निवशकों को डरने की जरूरत नहीं है। कंपनी की दिवालिया होने या डूबने की संभावना खत्म हो गई है। सरकार को कर्ज की एवज में इक्विटी जारी करने से कंपनी की वित्तीय स्थिति​ और मजबूत होगी। वहीं, दूसरी ओर उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ेगा। इससे कंपनी के सब्सक्राइबर बढ़ेंगे जो आय बढ़ाने का काम करेंगे। यह कंपनी को मुनाफे में लेकर आ आएगी। कुल मिलकार आने वाला समय एक बार फिर से आइडिया का है। लंबी अवधि के लिए किया हूआ निवेश फायदे का सौदा होगा।

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