क्या इस ‘पवित्र पर्वत’ से होकर झारखंड में गुजरेगी वाराणसी-हावड़ा बुलेट ट्रेन, रूट में आएंगे 5 जिले

रांची/गिरिडीह. भारत के पूर्वी क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार की कवायद जारी है. इसको लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत सीमाओं से लगते विभिन्न राज्यों से व शेष भारत से कनेक्टिविटी विस्तार पर जोर दिया जा रहा है. इसी क्रम में यूपी से बिहार-झारखंड होते हुए पश्चिम बंगाल तक हाई स्पीड ट्रेन (बुलेट ट्रेन) चलाने की योजना पर कार्य जारी है. इस ट्रेन की अधिकतम गति 350 किमी प्रति घंटे होगी. मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए अलग से पटरी बिछाई जाएगी. हालांकि, इसका फाइनल रूट क्या होगा यह अभी तक सामने नहीं आया है. फिलहाल इसके लिए सर्वे कार्य जारी है और अधिक फायदेमंद रूट को लेकर कार्ययोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इसके मद्देनजर यह भी विचार किया जा रहा है कि बुलेट ट्रेन के रुट को झारखंड के पारसनाथ से गुजारा जाए.

बता दें कि पारसनाथ में विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल है. यहां देश-दुनिया से जैन धर्म के लोग आते हैं. नई बुलेट ट्रेन रूट के लिए पटरी पारसनाथ के आसपास से गुजरेगी. इसे ध्यान में रखकर भी सर्वे किया जा रहा है. पारसनाथ से बुलेट ट्रेन रूट को कनेक्ट करने पर रेलवे को काफी पैसेंजर मिल सकते हैं. शिखरजी या श्री शिखरजी या पारसनाथ पर्वत या फिर पारसनाथ पहाड़ी नाम से प्रसिद्ध यह स्थान झारखंड के गिरिडीह जिले में है. विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थलों में एक ‘श्री सम्मेद शिखरजी’ के रूप में प्रसिद्ध है.

बता दें कि जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों (सर्वोच्च जैन गुरुओं) ने मोक्ष की प्राप्ति की. यहीं 23 वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था. माना जाता है कि 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों ने यहां पर मोक्ष प्राप्त किया था. यानी यह श्वेताम्बर व दिगम्बर, दोनों जैन धर्मावलंबियों के लिए पुण्यभूमि है. इसके साथ ही 1,350 मीटर (4,430 फीट) ऊंचा यह पहाड़ झारखंड का सबसे ऊंचा स्थान भी है. यहां की प्राकृतिक छटा भी देखने योग्य है. ऐसे में यहां तीर्थ यात्रियों के साथ ही पर्यटकों का भी बहुतायत में आना-जाना है. यही कारण है कि बुलेट ट्रेन को पारसनाथ से गुजारने की योजना पर भी विचार हो रहा है.

मिली जानकारी के अनुसार गिरिडीह के बगोदर इलाके में सर्वे कार्य पूरा कर लिया है और कोडरमा, धनबाद, हजारीबाग समेत ट्रेन के गुजरने वाले कई इलाके में सर्वे किया जा रहा है. हालांकि, यह अभी तय नहीं है कि यह रूट वाया सासाराम-गया-धनबाद होगी या पटना. लेकिन, यह तय है कि इसके लिए नई पटरी बिछाई जाएगी. ऐसे में कहा जो खबर सामने आ रही है कि अगर बुलेट ट्रेन की योजना वाया धनबाद होगी तो इसे गिरिडीह के पारसनाथ स्टेशन से भी गुजारा जाएगा.

गौरतलब है कि रेलवे ने देश के कई रूटों पर हाई स्‍पीड रेल कारिडोर बनाने की योजना तैयार की है, जिसमें वाराणसी-हावड़ा का रूट भी शामिल है. इसके लिए सर्वे किया जा रहा है. वाराणसी-नई दिल्‍ली के हाई स्‍पीड रेल का सर्वे पहले ही पूरा हो चुका है और इसका प्रोजेक्‍ट अलग है. इन दोनों योजनाओं के पूरा होने पर दिल्ली से हावड़ा का सफर चंद घंटों में पूरा हो सकेगा. रेलवे के इस प्रोजेक्‍ट पर आधिकारिक स्‍तर से अभी बहुत अधिकारी जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं दी जा रही है. इसके चलते कई तरह के कयास और भ्रम लोगों के बीच पैदा हो रहे हैं.

ताजा मामला वाराणसी-हावड़ा हाइ स्‍पीड रेल के रूट को लेकर है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह रेल रूट वाराणसी से शुरू होकर बिहार के सासाराम, गया होकर झारखंड के धनबाद होते हुए जाएगा. दूसरी तरफ, कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि यह रेल रूट वाराणसी से बक्‍सर, आरा, पटना, नवादा के रास्‍ते धनबाद होकर पूरा होगा. बुलेट ट्रेन के इस रूट को लेकर रेलवे की तैयारियां और चर्चाएं काफी लंबे अरसे से चल रही हैं.

जानकारी के मुताबिक रेलवे से जुड़ी निर्माण कंपनी इरकान ने 22 जुलाई 2010 को हाइ स्‍पीड रेल नेटवर्क के लिए प्रि फ‍िज‍िब‍िल‍िटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए निविदा आमंत्रित की थी. इस निविदा में दिल्‍ली- आगरा- लखनऊ- वाराणसी होते हुए पटना तक 991 किलोमीटर लंबे रूट पर हाइ स्‍पीड रेल कारिडोर बनाने की बात थी. केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद दिल्‍ली से हावड़ा तक हाइ स्‍पीड रेल के लिए सर्वे शुरू किया गया, हालांकि इस रूट को दिल्‍ली से वाराणसी और वाराणसी से हावड़ा तक दो हिस्‍सों में बांट दिया गया.

गौरतलब है कि एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वाराणसी से सासाराम व गया के रास्‍ते हावड़ा तक ट्रैक तैयार करना कही अधिक आसान हो सकता है. इससे दूरी भी कुछ हद तक घट जाएगी.वाराणसी-हावड़ा हाई स्‍पीड रेल नेटवर्क के लिए सर्वे का काम टीला कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और मोनार्क सर्वेयर्स एंड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के कंसोर्टियम को सौंपा गया है. बहरहाल, अब सबको इंतजार इस बात का है कि क्या वाराणसी-हावड़ा बुलेट ट्रेन रूट झारखंड के तीर्थस्थल पारसनाथ से गुजरेगा.

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