क्या भगत सिंह की फांसी से डर गयी थी अंग्रेज सरकार ?

भगत सिंह को कौन नहीं जानता वो अपने देश के लिए शहीद हो गए थे उन्हें 23 साल की उम्र में ही फांसी दे दी गयी थी लेकिन क्या आप जानते है की भगत सिंह को फांसी देकर खुद अंग्रेज सरकार भी डर गयी थी। 
इसलिए उन्हें एक दिन पहले फांसी दे दी गयी थी अंग्रेज सरकार ने असेम्बली में  ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’और  ‘ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल’ लाने की तैयारी में थी।
ये बहुत ही सख्त कानून थे इसे वो क्रांतिकारियों के खिलाफ उपयोग में लेना चाहती थी लेकिन इससे भारतीयों को नुकशान होने का खतरा था।
 इसलिए भगत सिंह,राजगुरु ,और सुखदेव ने असेम्ब्ली में बम फेकने की योजना बनायीं और बटुकेश्र्वर दत्त भी उनके साथ थे।
उन्होंने खाली जगह पर ही बम फैंका इस बम से किसी को कोई नुकशान नहीं पंहुचा और भगत सिंह और बटुकेश्र्वर दत्त बम फेंकने के बाद भी वह से भागे नहीं।
और अपनी मर्जी से गिरफ्तार हो गए लेकिन अंग्रेज सरकार ने उन को “लाहौर षड़यन्त्र’केस में फंसा दिया गया और 7 अक्टूबर, 1930 को उनको फांसी की सजा दी गयी।
इसमें बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावाज की सजा सुनाई गई थी लेकिन इनको फांसी की सजा सुनाने के पुरे भारत में लोगो ने दंगे शुरू कर जुलुस निकलने लग गए।
 इससे अंग्रेज सरकार डर गयी बघात सिंह को 24 मार्च को फांसी की सजा देना तय था लेकिन अंग्रेज सरकार ने आंदोलन के डर से उन तीनो को एक दिन पहले ही फांसी उन्हें फांसी दे दी और चुप चाप उनके शव के टुकड़े करके सतुलज नदी में फेंकने कीयोजना बनाई
लेकिन लोगो के देख लेने से अंग्रेजो के सैनिक भाग गए और लोगो ने उनका विधिवत अंतिम संस्कार किया।

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