Vinayaka Chaturthi : आज है ‘विनायक चतुर्थी’, जानिए पूजा विधि और महत्व

हमारे हिंदू संस्कृति में भगवान गणपति की सर्वप्रथम पूजा की जाती है. ये हमेशा से ऐसा ही होता चला आ रहा है. पहले गणपति की पूजा होती है, उसके बाद ही कोई कार्य होते हैं. हर माह में दो चतुर्थी तिथि होती है और इस तिथि को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है.

इस बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थि तिथि अब से महज दो दिन बाद यानी 14 जून दिन सोमवार को है. ऐसी मान्यता है कि, भगवान गणपति की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान से करने पर व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ-साथ सुख-समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है और यश की भी प्राप्ति होती है.

भगवान गणेश को ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य वाले देवता के रूप में पूजा जाता है. क्यूंकि भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय होते हैं तो गणेश चतुर्थी के इस पावन दिन पर उन्हें मोदक का भोग अवश्य लगाना चाहिए. और इसे ही प्रसाद के रूप में लोगों में वितरित भी करना चाहिए.

विनायक चतुर्थी की पूजा सामग्री

विनायक चतुर्थी से एक दिन पूर्व ही इसके लिए सारी सामग्रियों को इकट्ठा कर लेना चाहिए ताकि पूजा के समय किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो. इन सामग्रियों में लकड़ी की चौकी, लाल कपड़ा, भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर, कलश, पंचामृत, रोली, अक्षत, कलावा, जनेऊ, गंगाजल, इलायची, लौंग, नारियल, सुपारी, पंचमेवा, घी, मोदक और कर्पूर.

पूजा विधि

भगवान गणेश की पूजा करने से पूर्व स्नान करके पवित्र आसन पर बैठना चाहिए. और बाजार से लाई गई सारी सामग्रियों को एकत्रित करने के पश्चात ही पूजन शुरू करना चाहिए. इसके अलावा क्यूंकि उन्हें दूर्वा भी अतंयत प्रिय होते हैं तो शुद्ध स्थान से चुनी हुई दूर्वा को अच्छे से धोकर ही भगवान गणेश को अर्पित करना चाहिए. मोदक को अर्पित करना न भूलें. देशी घी में मोदक बनाएं और उन्हें भगवान गणेश को अर्पित करें.

भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने के उपरांत उनका ध्यान करते हुए आरती करें. इस दौरान आपको अपने मन को सात्विक और पूर्ण रूप से प्रसन्न रखना चाहिए. पूजा समाप्त होते ही समस्त देवी-देवताओं का स्मरण करें. इसके बाद सभी को प्रसाद का वितरण करें.

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