UP Election 2022: आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को देनी होगी जानकारी, मतदान का वक्त एक घंटे बढ़ेगा

लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) 2022 के मद्देनजर चुनाव आयोग ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ (Lucknow) में प्रेस कांफ्रेंस की. मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा (Chief Election Commissioner Sushil Chandra) ने बताया कि आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को मीडिया में यह प्रसारित करना होगा कि उनके खिलाफ कौन-सी धाराएं लगी हैं, कौन-से मामले चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को भी यह प्रसार करना होगा कि उन्होंने ऐसी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को क्यों चुना है? चुनाव आयोग ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान का समय एक घंटा बढ़ाया जाएगा. अब सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक वोटिंग होगी.

सुशील चंद्रा ने कहा कि मतदाता पंजीकरण का कार्यक्रम भी चल रहा है. उस पर काफी मेहनत हुई है. 5 जनवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा के मुताबिक, कम से कम एक लाख बूथ पर वेबकास्टिंग की जाएगी ताकि यह लोग देख सकें कि पूरी पारदर्शिता के साथ वोटिंग होगी. कम से कम 800 पोलिंग स्टेशन ऐसे बनाए जाएंगे जहां सिर्फ महिला पोलिंग अधिकारी होंगे. मतदाता एपिक कार्ड के अलावा 11 अन्य दस्तावेज दिखाकर वोटर वोट डाल सकता है. इसमें पैन कार्ड, आधार कार्ड, मनरेगा कार्ड जैसे दस्तावेज शामिल हैं.

 

CEC सुशील चंद्रा ने कहा कि राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद सभी एसपी, डीआईजी, कमिश्ननर से मिलकर हालात का जायजा लिया गया. इसके बाद सभी नोडल अधिकारियों से चर्चा की गई. सबसे अंत में मुख्य सचिव, डीजीपी और अन्य अधिकारियों से बातचीत की. सभी दलों ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए निश्चित समय पर चुनाव कराने की मांग की. कुछ दलों ने कोविड प्रोटोकॉल के बिना पालन किए होने वाली रैलियों पर चिंता जताई. अब तक 15 करोड़ से ज्यादा मतदाता पंजीकृत हैं. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख तक भी मतदाता सूची में अपने नाम को लेकर दावे-आपत्ति बता सकते हैं. मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा ने बताया कि 80 वर्ष से अधिक आयु के लोग, विकलांग व्यक्ति और कोरोना से संक्रमित लोग जो मतदान केंद्र पर नहीं आ पा रहे हैं, चुनाव आयोग उनके दरवाजे पर वोट के लिए पहुंचेगा.

मतदान में गिरावट चिंता का विषय
इसके अलावा उन्होंने यूपी में घट रही मतदान प्रतिशत पर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा, ‘2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में 61 फीसदी मतदान हुआ था. 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी में 59 फीसदी मतदान हुआ था. यह चिंता का विषय है कि जिस राज्य में लोगों में राजनीतिक जागरूकता अधिक है, वहां मतदान प्रतिशत कम क्यों है?’

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