UP Assembly Election: एसपी कार्यालय में भीड़ पर चुनाव आयोग सख्त, नेताओं पर मुकदमा दर्ज तो इंस्पेक्टर को किया संस्पेड

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) से पहले चुनाव आयोग (Election Commission) सख्त हो गया है और शुक्रवार को विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के कार्यालय में सदस्यता कार्यक्रम और वर्चुअल रैली के नाम पर एकत्रित भीड़ पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया. चुनाव आयोग के निर्देश पर लखनऊ के जिलाधिकारी के आदेश के बाद एसपी नेताओं और करीब ढाई हजार कार्यकर्ताओं के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई. वहीं भीड़ जुटाने के लिए डीएम की रिपोर्ट को लापरवाह मानते हुए इंस्पेक्टर गौतमपल्ली दिनेश सिंह बिष्ट को निलंबित कर दिया है.

इसके साथ ही चुनाव आयोग ने एसीपी हजरतगंज अखिलेश सिंह और एसीएम आई (रिटर्निंग ऑफिसर) गोविंद मौर्य को 15 जनवरी को सुबह 11 बजे स्पष्टीकरण देने को कहा गया. इसके साथ ही चुनाव आयोग ने भी देर रात एसीपी और एसीएम के पद पर नई तैनाती के लिए तीन-तीन नामों का पैनल देने को कहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ के पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर ने इंस्पेक्टर दिनेश सिंह बिष्ट को निलंबित कर दिया है. वहीं नए इंस्पेक्टर की तैनाती के लिए तीन नामों का पैनल भी चुनाव आयोग को भेजा गया है.

चुनाव आयोग नेताओं पर कर सकता है कार्यवाही

वहीं माना जा रहा है कि इस मामले में चुनाव आयोग और बड़ी कार्यवाही कर सकता है. क्योंकि चुनाव आयोग ने रा्ज्य में कोरोना की स्थिति को देखते हुए नियम जारी किए थे और रैलियों और भीड़ एकत्रित करने को लेकर रोक लगाई थी. असल में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी समेत कई नेता शुक्रवार को समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेने पार्टी कार्यालय पहुंचे थे और वहां पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मौजूद थे. एसपी कार्यालय में हजारों की संख्या में भीड़ थी और कोरोना गाइड लाइन के उल्लंघन की सूचना मिलने पर जिला निर्वाचन अधिकारी व डीएम अभिषेक प्रकाश ने डीसीपी ईस्ट अपर्णा गौतम को प्राथमिकी दर्ज करने को कहा था.

 

भीड़ जुटती रही और अफसर बने रहे लापरवाह

लखनऊ में धारा 144 लागू होने और आचार संहिता लागू होने के बाद भी एसपी कार्यालय के बाहर करीब ढाई हजार कार्यकर्ताओं के जमावड़ा था. इसके लिए चुनाव आयोग ने डीएम की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि गौतमपल्ली पुलिस और अन्य पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के कारण भीड़ इकट्ठा हुई और गौतमपल्ली इंस्पेक्टर भीड़ को इकट्ठा होने से नहीं रोक सके. इसके साथ ही लखनऊ के पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन किया गया है और वहां इतनी भीड़ कैसे पहुंची, इसके लिए पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर पता लगा रही है.

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