UP Assembly Election 2022: उत्तर प्रदेश में अजेय है राम पुर ख़ास की सीट 1980 से अब तक कांग्रेस का कब्ज़ा

प्रमोद तिवारी (कांग्रेस) उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से अपनी सियासी हनक बनाएं रखने वाले कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी (Pramod Tiwari Congress) प्रतापगढ़ से दिल्ली तक झंडा बुलंद किये हुए है. यूपी विधानसभा (UP Vidhan Sabha Chunav) में दस बार एक ही सीट और एक ही सिंबल से पहुंचने वाले एकमात्र नेता है. जिनका नाम गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. प्रमोद तिवारी अपनी सियासी विरासत अपनी बेटी को सौंप चुके हैं. हालांकि देश और प्रदेश की राजनीति में सक्रिय है. यूपी की विधानसभा में 10 बार जीत कर पहुंचे प्रमोद तिवारी निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए. जिसके बाद से उनकी बेटी आराधना मिश्रा प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास सीट पर विधायक है.

41 बरस से सियासी कब्जा

प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट पर 41 बरस से कांग्रेस पार्टी का कब्जा है. इस दौरान जब कांग्रेस जब सूबे में हाशिए पर थी,उस दौर में भी प्रमोद तिवारी की सीट पर कांग्रेस का ही परचम लहराया. सूबे में चाहे राम लहर रही हो या मोदी लहर प्रमोद तिवारी की सीट पर किसी की दाल नहीं गली. 1980 के चुनावी समर में कूदने वाले प्रमोद तिवारी 34 वर्षों तक यहां से विधायक रहे वर्ष 2014 में प्रमोद तिवारी निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुने गए .उसके बाद उन्होंने अपनी रामपुर खास की सीट अपनी बेटी आराधना मिश्रा मोना को सौंप दी. आराधना 2014 के उप चुनाव के बाद बीते 2017 के विधानसभा चुनाव में रामपुर खास से विधायक हैं.

सामान्य परिवार में जन्मे प्रमोद

प्रमोद तिवारी के पिता किसान थे ,सामान्य परिवार में जन्मे प्रमोद तिवारी ने सियासत में एक नई इबारत लिखने का काम किया. प्रमोद तिवारी रामपुर ख़ास की सीट से लगातार चुनाव जीते 1984 से 1989 के बीच दो बार राज्य मंत्री रहे. दस बार एक ही विधानसभा सीट से जीतकर एक ही चुनाव चिन्ह पर विधानसभा पहुंचे .जिसके लिए प्रमोद तिवारी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया 2012 के विधानसभा चुनाव में दसवीं बार विधानसभा पहुंचे. प्रमोद तिवारी 2014 में राज्यसभा चले गए और उनकी बेटी ने उपचुनाव में जीत दर्ज की.

सियासी किले बंदी कोई तोड़ नहीं पाया

2014 में देश में लोकसभा का चुनाव हुआ मोदी लहर अपने शबाब पर थी. लेकिन रामपुर खास की जनता पर मोदी लहर का कोई प्रभाव नहीं हुआ. प्रमोद तिवारी उपचुनाव में भी अपनी बेटी आराधना मिश्रा को जीत दिलाने में सफल हुए. वह 2017 में जब मोदी योगी और अमित शाह जैसे दिग्गज नेताओं की प्रतापगढ़ जिले में रैली हुई उसके बावजूद भी यह सीट कांग्रेस के पास ही रही.सियासी तौर पर जीत- हार जनता के हाथ में होती है. लेकिन रामपुर खास की जनता प्रमोद तिवारी की इस कदर मुरीद है कि उनकी सियासी किलेबंदी को कोई भी तोड़ नहीं पाया. राजनीति के बड़े-बड़े दिग्गजों ने इस विधानसभा क्षेत्र में दांव आजमाया और फिर वापस लौट गए.

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