एक रिश्ता ऐसा भी 

 

तुम आये जब से मेरे जीवन में नया सवेरा बनकर
ग़मों के बादलों को मायूस लौटते हुए देखा है
कितने ही खुबसूरत लम्हात साथ गुजारे हैं
कितनी ही खुशियों की बहारों को हमने देखा हैं
अपने प्यार के पौधे को पल पल बढ़ते हुए देखा है
उसको जज्बातों के पानी से सींचते हुए देखा है
देखभाल की खाद से उसको पनपते हुए देखा है
प्यार के पौधे पर कोपलें फूटते हुए देखा है
प्यार की उस नन्हीं कली को फुल बनते देखा है
माना फूलों के साथ काँटों की चुभन भी सही है
जोकि किसी भी रिश्ते का एक अटूट हिस्सा होता है
धीरे धीरे अपने प्यार को परवान चढ़ते भी देखा है
कदम कदम पर आती अटकलों को भी देखा है
और उन सबसे निजात पाते भी हमने देखा है
हर दुःख और दर्द को मिलकर हमने बांटा है
और बाँटते रहेंगे आगे भी ऐसा हमने सोचा है
नित दिन प्यार हमारा परिपक्व हो रहा है
दिल को एक सुकून का आभास हो रहा है
जैसे आग में तपकर सोना निखरता जाता है
हमने भी प्यार की भट्टी में खुद को तपाया है
तुम पास रहो या दूर हो कोई फर्क नहीं पड़ता है
एक दूजे को हमने दिल में जो बसाया है
तुम्हारी मूक भाषा को अब मैं पढ़ने लगी हूँ
मेरे इशारों को तुमने क्या खूब अपनाया है
अपनी सूझ बुझ से प्यार की एक दुनिया बसाई है
प्यार की पराकाष्ठा को दुनिया को दिखलाया है

— सुमन मोहिनी
दिल्ली

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