सपनों पर चला ट्रंप का हथौड़ा, 1 लाख वीजा अचानक कैंसिल, क्या इस लिस्ट में भारतीय भी शामिल हैं?
News India Live, Digital Desk : अक्सर कहा जाता है कि अमेरिका जाकर बसना और वहाँ काम करना लाखों भारतीयों के लिए एक सपने जैसा होता है। लेकिन पिछले कुछ घंटों से सोशल मीडिया और न्यूज़ की दुनिया में एक ऐसी खबर दौड़ रही है, जिसने हजारों परिवारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। खबर है कि ट्रंप प्रशासन के दोबारा सत्ता में आते ही वीजा को लेकर बहुत बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 1 लाख (One Hundred Thousand) वीजा रद्द कर दिए गए हैं।
ये खबर इतनी हैरान करने वाली क्यों है?
देखिये, वीजा रद्द होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जिस स्केल (पैमाने) पर यह काम हुआ है, उसने सबको चौंका दिया है। कल्पना कीजिए कि आपने सालों तक मेहनत की, लाखों रुपये खर्च किए और अब एक ही झटके में आपको पता चले कि आपका वहां रुकना या वहां जाना मुश्किल है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उन लोगों पर ज्यादा हो रही है जिनके दस्तावेजों (Documents) में थोड़ी भी कमी मिली है या जिनकी वीजा प्रक्रिया को ट्रंप प्रशासन की नई और सख्त नीतियों के हिसाब से 'खतरनाक' या 'अनियंत्रित' माना गया है।
आखिर कौन है इस रद्दीकरण की ज़द में?
फिलहाल जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है, उसमें सबसे ज्यादा गाज उन पर गिरी है जो अवैध रूप से या पुराने नियमों का फायदा उठाकर वहां बसे थे। हालांकि, इस '1 लाख' के आंकड़े ने कानूनी तौर पर वहां रह रहे छात्रों (Students) और H-1B वीजा वाले प्रोफेशनल्स को भी चिंता में डाल दिया है। ट्रंप का साफ संदेश है— "अमेरिका फर्स्ट"। यानी अब वहां रहने के लिए नियम पहले से कहीं ज्यादा कड़े होने वाले हैं।
इसका असर भारत पर क्या पड़ेगा?
सच कहें तो, जब भी अमेरिका में वीजा को लेकर ऐसी हलचल होती है, उसका सबसे ज्यादा असर भारत और चीन जैसे देशों पर ही पड़ता है। अगर इन 1 लाख रद्द किए गए वीजा में भारतीय प्रोफेशनल्स की संख्या बड़ी हुई, तो यह भारत के आईटी (IT) सेक्टर के लिए भी एक बड़ा झटका हो सकता है। कई लोग तो ये भी कह रहे हैं कि ये सिर्फ 'शुरुआत' है, ट्रंप का पूरा कार्यकाल इमिग्रेशन के नियमों को इसी तरह सख्त बनाए रखने वाला है।
अब क्या करें लोग?
अगर आप या आपके कोई जानकार अमेरिका में हैं, तो पैनिक करने से अच्छा है कि आप अपने पेपर्स और वीजा स्टेटस को लेकर एकदम अपडेट रहें। ट्रंप 2.0 की ये नीतियां पहले वाली नीतियों से कहीं ज्यादा धारदार और सीधी दिख रही हैं। कूटनीतिक लेवल पर भारत सरकार भी शायद इस पर नज़र रख रही होगी, लेकिन फिलहाल मुसाफिरों और वहाँ बसे लोगों के लिए ये वक्त किसी इम्तिहान से कम नहीं है।
कुल मिलाकर, ये खबर यह बताने के लिए काफी है कि अब अमेरिका में 'इमिग्रेशन का खेल' पूरी तरह से बदल चुका है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि ये कड़ाई कहाँ जाकर रुकती है।