नसों की कमजोरी दूर करने के लिए रोज करें ये योगासन, जानें फायदे

नसों की कमजोरी की वजह से हमारे शरीर का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ सकता है। हमारे पूरे शरीर में नसों का जाल बिछा हुआ है। चलने, बोलने और काम करने की क्रिया भी नसों द्वारा ही संचालित होती है लेकिन अगर आपकी नसों में कमजोरी या किसी अन्य तरह की समस्या है, तो इससे आप अपना दैनिक काम भी अच्छे से नहीं कर पाते हैं।

कई लोगों को सीढियां चढ़ने और सीधे बैठने में भी परेशानी होती है। नसों की कमजोरी के कारण आपके शरीर की संरचना भी बिगड़ सकती है। इसलिए नसों की मजबूती और सही ढंग से काम करने के लिए आपको कुछ खास योगासन करने की जरूरत है। इसके लिए हम आपको ऐसे योगासन बताने जा रहे हैं, जिससे आपकी नसों में होने वाली कमजोरी ठीक हो सकती है और आप अपने दैनिक और ऑफिस के काम भी बिना किसी रूकावट के कर सकते हैं।

इस योगासन में आप तितली की मुद्रा में बैठकर अपने पैरों को हिलाते हैं। इस योगासन से आपको करने में मदद मिलती है और पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छे से होता है, जिससे नसों में मजबूती आती है। रोजाना इसका अभ्यास करने से कमर और कूल्हे के नसों में आराम मिलता है और लचीलापन भी आता है। साथ ही इससे मासिक धर्म की समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलती है।

बद्धकोणासन करने का तरीका

1. पैरों को सीधा करके बैठ जाएं।

2. अपने घुटनों को मोड़ें और अपने पैरों के तलवों को साथ लाएं, आपके दोनों तलवे एक-दूसरे से स्पर्श करना चाहिए।

3. अपनी एड़ियों को करीब लाएं, जिससेकि आपके घुटनों में दबाव या दर्द महसूस न हो।

4. अपनी दोनों हथेलियों से पैरों को पकड़ें।

5. दोनों घुटनों को एकसाथ ऊपर की ओर ले जाएं और फिर नीचे की ओर लाएं।

6. इस अभ्यास को आप 1 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानियां

1. घुटनों में चोट होने पर इस आसन से बचें।

2. पीरियड्स के दौरान इस अभ्यास से बचें।

3. साथ ही गर्भावस्था में इस योगासन को करने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

2. वज्रासन (Vajrasnas Pose)

वज्रासन योगासन से पीठ और निचले हिस्से की नसों को मजबूत करने में मदद मिलती है। साथ ही इससे पेट की में भी मदद मिलती है। इससे पैरों के पसलियों और नसों में भी आराम मिलता है। इस योगासन के अभ्यास पीठ और पैरों के हिस्से में आराम मिलता है।

वज्रासन करने का तरीका

1. इस योगासन को करने के लिए घुटनों के बल जमीन पर खड़े हो जाएं।

2. इसके बाद अपने हिप्स को एड़ी पर रखकर बैठ जाएं।

3. सिर को सीधा रखें और हाथों को अपने घुटनों पर रखें।

4. अपनी आंखें बंद करके सांस लें और छोड़ें।

5. इस अभ्यास को आप 5-10 मिनट के लिए कर सकते हैं।

सावधानियां

1. अगर आपके घुटनों में समस्या है, तो आपको इस योगासन को करने से बचना चाहिए।

2. आंतों के अल्सर, हर्निया या पेट संबंधित समस्या में इसका अभ्यास न करें।

3. रीढ़ की हड्डी में परेशानी होने पर भी इसके प्रयोग से बचें।

3. सुप्त मत्स्येन्द्रासन 

सुप्त मत्स्येन्द्रासन की मदद से शरीर की नसों में खिंचाव आता है। साथ ही कई दर्द और नसों के दर्द में भी इससे आराम मिलता है। इससे रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है। इससे ब्लड सर्कुलेशन औप पेट की मांसपेशियों में भी आराम मिलता है।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन करने का तरीका

1. इस आसन को शरू करने के लिए सबसे पहले मैट बिछाकर लेट जाएं।

2. इसके बाद अपने दोनों हाथों को कंधे के समानांतर दोनों तरफ फैला लें।

3. फिर दाएं पैर को घुटने के पासे से मोड़ लें और उपर की ओर उठाएं।

4. दाएं पैर को बाएं घुटने पर टिका लें।

5. इसके बाद सांस छोड़ते हुए, दाएं कूल्हे को उठाएं और पीठ के बाएं तरफ मोड़ लें व दाएं घुटने को नीचे की तरफ जाने दे और ऐसा करते वक्त दोनों हाथ जमीन पर ही रखें।

6. दाएं घुटना को पूरी तरह से शरीर के बाएं तरफ टिका लें।

7. अब सिर को दाईं तरफ घुमाएं।

8. इस मुद्रा में आप 30 से 60 सेकंड तक रहें और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं।

सावधानियां

1. यदि पीठ दर्द, रीढ़ की हड्डी में दर्द होने पर इस योगासन को ध्यान से करें। हो सके तो ट्रेनर की उपस्थिति में ही करें।

2. यदि आपके घुटनों या कूल्हों में चोट हो तो इस आसन का अभ्यास न करें।

4. हलासन (Halasana pose)

हलासन योगासन की मदद से आपके शरीर की सभी नस-नाड़ियों का सही संचालन होता है। इससे दिमाग की नसों को भी आराम मिलता है और आप तनवामुक्त अनुभव करते हैं। इससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और शुगर कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है।

हलासन करने के तरीके

1. योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।

2. अपने हाथों को शरीर के पास ले आएं। हथेलियां जमीन की तरफ रहेगी।

3. सांस भीतर की ओर खींचते हुए पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं।

4. पैर कमर से 90 डिग्री का कोण बनाएंगे। साथ ही इसका दबाव पेट की मांसपेशियों पर रहेगा।

5. टांगो को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें।

6. सीधी टांगों को सिर की तरफ झुकाएं और पेरों को सिर के पीछे ले जाएं।

7. पेरों के अंगूठे से जमीन को छुएंगे।

8. हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें। हथेली नीचे की तरफ रहेगी।

9. इस स्थिति में एक मिनट तक बने रहें और सांसों पर ध्यान केंद्रित करें सांस छोड़ते हुए, पैरों को वापस जमीन पर ले जाएं।

सावधानियां

1. अगर आपको डायरिया या गर्दन में चोट की समस्या है तो हलासन का अभ्यास न करें।

2. अगर बीपी या अस्थमा की परेशानी है तो इस आसन का अभ्यास न करें।

3. शुरुआत में इसे ट्रेनर की देखरेख में करने की कोशश करें।

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