Chaturmas में किए गए ये काम बदल देंगे पूरी Life, हर ख्‍वाहिश होगी पूरी

नई दिल्‍ली: चातुर्मास (Chaturmas) का पहला महीना सावन (Sawan) शुरू हो चुका है. लोग शिव भक्ति में लीन हो गए हैं. शिव-पूजा, रुद्राभिषेक (Rudrabhishek) हो रहे हैं. हिंदू धर्म में जिस तरह सावन महीने में कुछ खास नियमों (Sawan Month Rules) का पालन करने के लिए कहा गया है, उसी तरह चातुर्मास के लिए भी कहा गया है. जाहिर है इन नियमों का पालन करने से व्‍यक्ति को कई तरह के लाभ भी मिलते हैं. आज हम चातुर्मास के कुछ जरूरी नियमों (Chaturmas Rules) और उनके पालन से होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं.

चातुर्मास में पालन करें ये नियम

– चातुर्मास में सूर्योदय से पहले जागना बहुत अच्‍छा माना जाता है. इसके बाद स्‍नान करके सूर्य को जल चढ़ाएं. ऐसा करने से भगवान आरोग्‍य का आशीर्वाद देते हैं और व्‍यक्ति स्‍वस्‍थ रहता है.

– चातुर्मास में पड़ने वाले व्रत करें. व्रत के दिन के अलावा भी रोजाना पूजा-पाठ करें. हिंदू धर्म में इस दौरान जमीन पर सोने के लिए कहा गया है.

 

– चातुर्मास के दौरान ज्‍यादातर समय मौन रहें और कोशिश करें कि भगवान की आराधना करें. इससे मन को शांति मिलेगी और चातुर्मास में भक्ति-भाव से की गई भगवान की आराधना बहुत फल देती है.

– हो सके तो रोजाना कुछ देर ध्‍यान करें. चातुर्मास में सत्‍संग, भजन-कीर्तन में हिस्‍सा लेने से भी बहुत लाभ होता है.

– चातुर्मास में हो सके तो दिन में एक बार ही भोजन करें. इससे स्‍वास्‍थ्‍य बहुत अच्‍छा रहता है. तला-मसालेदार भोजन न खाएं. यदि जरूरत पड़े तो रात में फलाहार कर लें.

 

– इन 4 महीनों में ब्रह्मचर्य का पालन करें.

– पितरों को तर्पण करें. जितना संभव हो दान करें. इसके लिए गरीबों, जानवरों-पक्षियों के लिए भोजन की व्‍यवस्‍था करें. कपड़े दान में दें. मंदिर में दीप जलाएं या नदी में प्रवाहित करें.

 

– इस दौरान शनिवार के दिन कटोरी में सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर उस तेल को कटोरी सहित मंदिर में दान कर आएं. इससे कुंडली के शनि दोष समाप्‍त होते हैं.

 

होंगे कई लाभ 

चातुर्मास में इन नियमों का पालन करने से बहुत लाभ होता है. भगवान शिव और भगवान विष्‍णु की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. पाप नष्‍ट होते हैं. स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर होता है. आर्थिक स्थिति बेहतर होती है, घर में धन-धान्‍य बढ़ता है. मान-सम्‍मान बढ़ता है. व्‍यक्ति के शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य के साथ-साथ मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य भी बहुत अच्‍छा होता है. पितरों का आशीर्वाद जिंदगी में खुशियां लाता है. व्‍यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता मिलने लगती है. साथ ही व्‍यक्ति में कांफीडेंस बढ़ता है. उसमें त्‍याग-समर्पण जैसे गुण विकसित होते हैं, जो उसके रिश्‍तों को बेहतर करते हैं.

Check Also

अश्विन मास इंदिरा एकादशी कब है, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हमारे पौराणिक शास्त्रों में श्राद्ध पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का बहुत अधिक महत्व …