अपने अरबपति परिवार की संपत्ति को लेकर ब्रिटिश अदालतों में कानूनी विवादों में फंसे ब्रिटेन के हिंदुजा बंधु शुक्रवार को लंदन में एक गुप्त समझौते के लिए राजी हो गए हैं। मामला शुरू में 86 वर्षीय श्री चंद हिंदुजा द्वारा दायर किया गया था, जिन्हें परिवार का मोबाई माना जाता है। उसने 2 जुलाई 2014 को अपने भाइयों जीपी हिंदुजा, पीपी हिंदुजा, अशोक हिंदुजा के खिलाफ केस शुरू किया था। यह मामला नवंबर 2019 से लंबी कानूनी कार्यवाही के दौर से गुजर रहा था। आपसी झगड़ों का खामियाजा पूरा परिवार भुगत रहा था। लॉर्ड जस्टिस पीटर जैक्सन, लॉर्ड जस्टिस बेकर और लॉर्ड जस्टिस वारबी की एक अदालत ने शुक्रवार को कहा कि एक समझौता हो गया है और अगस्त से कोर्ट ऑफ प्रोटेक्शन के आदेश को बरकरार रखा है।

हिंदुजा समूह लगभग एक दर्जन कंपनियों का संचालन करता है, जिनमें से छह भारत में सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली इकाइयां हैं। हिंदुजा समूह 38 देशों में डेढ़ लाख लोगों को रोजगार देता है। इसके संचालन में ट्रक निर्माण, बैंकिंग, रसायन, बिजली, मीडिया और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र शामिल हैं। अशोक लीलैंड के अलावा हिंदुजा समूह की कंपनियों में क्वेकर केमिकल कॉर्प और इंडसइंड बैंक लिमिटेड शामिल हैं।

हिंदुजा समूह के पास 15 अरब डॉलर की संपत्ति है

हिंदुजा परिवार के पास करीब 15 अरब डॉलर की संपत्ति है और हिंदुजा समूह फोर्ब्स की दुनिया के अरबपतियों की सूची में 110वें स्थान पर है। हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी अशोक लेलैंड बहुत लोकप्रिय है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, हिंदुजा परिवार ब्रिटेन के सबसे धनी लोगों में से एक है। समूह के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज हिंदुजाना के अनुसार समूह की सभी कंपनियों के स्वतंत्र बोर्ड हैं। चूंकि कंपनियों का प्रबंधन बोर्ड द्वारा किया जाता है, इसलिए पारिवारिक विवाद का कोई असर नहीं पड़ा है।