Dholpur: घर-आंगन में बिखरी लाडो की मुस्कान, लड़कों से ज्यादा हुआ लड़कियों का अनुपात

Dholpur: लिंग का अनुपात से तात्पर्य किसी क्षेत्र विशेष में पुरुष और स्त्री की संख्या के अनुपात को कहते हैं. प्राय किसी भौगोलिक क्षेत्र में प्रति हजार पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों की संख्या को इसकी इकाई माना जाता है. जिला कलक्टर राकेश कुमार जायसवाल ने बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अंतर्गत जिले में 1 हजार पुरुषों के मुकाबले 1 हजार 2 महिलाओं का लिंगानुपात है, जबकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 2015-16 में यह अनुपात 1 हजार पुरुषों के मुकाबले 917 था और 2011 जनगणना के आधार पर जिले में 1 हजार पुरुषों पर 845 महिला लिंगानुपात था.

उन्होंने बताया कि भारतीय समाज में बेटा-बेटी में फर्क करने की मानसिकता में बदलाव आने और लड़कियों की दशा और दिशा सुधरने और राज्य सरकार द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, पीसीपीएनडीटी अधिनियम के सख्ती से पालना, कन्या भ्रुण लिंग परिक्षण के विरूद्ध जागरूकता हेतु मुखबिर योजना आदि कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए जाने से पुरुष और महिलाओं के लिंगानुपात में वृद्धि हुई है.

 

सरकार द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, लाडली बेटी योजना, सुकन्या समृद्धि योजना नारी सशक्तिकरण की दिशा में बहुत अच्छे प्रयास किए गए. एक ओर जहां हिन्दुओं में लड़की को घर की लक्ष्मी और देवी, वहीं मुस्लिमों में बेटियों को नेमत माना गया है. इसके बाद भी लड़कियों के साथ जिस तरह का दोयम व्यवहार किया जाता था. अब सामाजिक सरोकार विचारों में परिवर्तन आने से और शिक्षा के प्रति जागरूक होने के कारण लिंगानुपात में इजाफा हुआ है.

जिले में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना अंतर्गत बेटियों के आत्म सुरक्षा के पहलू को ध्यान में रखते हुए बेटियों के आत्मरक्षा प्रशिक्षण की जिले में शुरुआत की गई. इससे सोच में बदलाव आया है. इस योजना के जिले में 1093 राजकीय प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, उच्च माध्यमिक विद्यालयों की 98,987 बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान किया गया. इससे न केवल जिले में बेटियों में आत्मविश्वास का भाव पैदा हुआ वरन सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई.

जिले में इसके साथ ही किशोर-किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत निजी और सरकारी विद्यालयों की शिक्षिकों को किशोर-किशोरी स्वास्थ्य संबंध में प्रशिक्षित किया. जिले में विविध आयोजनों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोदभराई, बेटी जन्मोत्सव जैसे कार्यक्रमों का आयोजन से सकारात्मक माहौल बना और इसके अलावा आमजन की बेटियों के प्रति सोच में परिवर्तन हुआ.

 

तेजी से बदलती हुई आत्मसंतुष्टी की परिभाषा वाले दौर में हमें व्यक्तिगत तौर पर की जाने वाली बातों से हटकर कहीं न कहीं किसी भी प्रकार से कुछ सामाजिक समस्याओं पर भी केंद्रित होने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि हमें समाज दिखता तो है पर हमारा समाज से सामाजिक सरोकार नहीं दिखता है लेकिन आज हमें ये याद रखने की जरूरत है कि सामाजिक सरोकार से ही समाज की दिशा और दशा को बदला जा सकता है. इसी के तहत आज जिला देश के मानचित्र पर उभरा है और लिंगानुपात में 85 अंकों का इजाफा करते हुए जिले में लिंगानुपात 1 हजार 2 महिलाएं प्रति 1 हजार पुरूष हो गया है.

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