क्रिकेट इतिहास का ओरिजिनल ‘मैच फिनिशर’, जिसने दी वनडे क्रिकेट को नई पहचान, 10 साल तक रहा अपनी टीम की जान

आज के दौर में जब भी क्रिकेट में सबसे बेहतरीन फिनिशर की बात होती है, तो सबसे पहला नाम अक्सर हर किसी की जुबान पर भारतीय दिग्गज और पूर्व कप्तान एमएस धोनी (MS Dhoni) का होता है. धोनी भले ही अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर हो गए हैं और पहले जैसे फिनिशर नहीं रहे हों, लेकिन करीब एक दशक तक उन्होंने इस रोल को बखूबी निभाया और यही कारण है कि उनका नाम सबके जेहन में आ ही जाता है. हालांकि, धोनी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छाने से ठीक पहले एक ऐसा खिलाड़ी भी था, जिसने वनडे क्रिकेट में मैचों को खत्म करने का अपना अलग ही तरीका ईजाद किया था. ये खिलाड़ी हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज माइकल बेवन (Michael Bevan). क्रिकेट का असली और पहला ‘मैच फिनिशर’.

माइकल बेवन का आज जन्मदिन है. बेवन आज 52 साल के हो गए हैं. ऑस्ट्रेलिया के इस स्टार क्रिकेटर का जन्म 8 मई 1970 को ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा के बेलकनेन शहर में हुआ था. बेवन को 1989 में ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट एकेडमी से स्कॉलरशिप मिली और उन्होंने साउथ ऑस्ट्रेलिया की ओर से क्रिकेट खेलने की शुरुआत की. 1990 में वह न्यू साउथ वेल्स से जुड़ गए और अपने संन्यास तक इसी टीम का हिस्सा रहे.

श्रीलंका के खिलाफ करियर की शुरुआत

बेवन ने 1994 में 23 साल की उम्र श्रीलंका के खिलाफ शारजाह में ऑस्ट्रेलियाई टीम की ओर से वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया था. इसी साल अक्टूबर में बेवन ने पाकिस्तान के खिलाफ कराची में टेस्ट करियर का भी आगाज किया. बेवन को टेस्ट क्रिकेट में ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन वनडे क्रिकेट में वह ऑस्ट्रेलियाई टीम का खास हिस्सा बन गए. मिडिल ऑर्डर में अपनी जुझारू बल्लेबाजी के दम पर टीम को बांधे रखने वाली डोर साबित होते गए और धीरे-धीरे टीम के लिए मैच जीतने वाली पारियां खेलने लगे.

वनडे क्रिकेट के पहले फिनिशर

बेवन को सही मायनों में वनडे क्रिकेट का पहला मैच फिनिशर कहा जा सकता है. बेवन से पहले भी कई दिग्गजों ने अपनी टीमों के लिए कई बार मैच जीते, लेकिन जिस अंदाज, परिस्थितियों और निरंतरता से बेवन ने ये काम किया, उसके कारण ही उन्हें ये नाम दिया गया. इसके कई उदाहरण उनके करियर में देखने को मिले.

1996 में सिडनी में वेस्टइंडीज के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई टीम की हालत खराब थी. टीम को सिर्फ 173 रन बनाने थे, लेकिन 38 रन पर ही 6 विकेट गिर गए. इसके बाद बेवन ने करीब ढाई घंटे तक बैटिंग की और नाबाद 78 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई.

बेवन ने 2004 में श्रीलंका के खिलाफ ही अपना आखिरी वनडे मैच भी खेला. इस बीच उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए कई मुश्किल मैच जीते. 2003 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ ऐसे ही टॉप ऑर्डर के लड़खड़ाने के बाद उन्होंने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर मैच जिताऊ पारियां खेलीं. अपनी ऐसी ही पारियों के कारण वह अक्सर नाबाद रहते थे. एक वक्त तक उनके नाम वनडे में सबसे ज्यादा 67 नाबाद पारियों का रिकॉर्ड था. साथ ही लंबे समय तक वह अकेले बल्लेबाज थे जिसका औसत 50 से ज्यादा का था.

बेवन का शानदार करियर

बेवन ने 1994 से 2004 के बीच ऑस्ट्रेलिया के लिए 232 मैचों में 196 पारियां खेलीं, जिसमें 6912 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 6 शतक और 46 अर्धशतक जमाए. उनका बैटिंग औसत 53.58 का है. इतना ही नहीं, बाएं हाथ की अपनी स्पिन से उन्होंने 29 विकेट भी हासिल किए. हालांकि, बेवन का टेस्ट करियर अच्छा नहीं रहा और 1998 में उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट खेला. उन्होंने 18 टेस्ट मैचों में सिर्फ 785 रन बनाए और सिर्फ 6 अर्धशतक लगा सके. साथ ही 36 विकेट भी उनके नाम आए. वह ऑस्ट्रेलिया के लिए 1999 और 2003 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य भी रहे.

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