विचार व आचरण में समभाव रखने वाला ही सच्चा धार्मिक : सीएम योगी

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गोरखपुर, 22 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विचार एवं आचरण में समानता का भाव रखने वाला ही सच्चा धार्मिक होता है। यही भाव उस व्यक्ति की विश्वसनीयता का आधार होता है। इस संदर्भ में मानवता की प्रतिमूर्ति हनुमान प्रसाद पोद्दार ”भाई जी” देह रूप में हमारे बीच न उपस्थित रहने के बावजूद अपनी गोलोक यात्रा के 51 साल बाद भी श्रद्धा भाव से प्रासंगिक हैं। भाई जी ने जो कहा, जो लिखा, उसी के अनुरूप अपना जीवन जीया और पूरे सनातन धर्मावलंबियों को प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री योगी गुरुवार शाम गीता वाटिका में विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पत्रिका कल्याण के आदि संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार ”भाई जी” की 130वीं जयंती पर आयोजित श्रद्धा अर्चन कार्यक्रम में अपने भावों को शब्दांजलि रूप में व्यक्त कर रहे थे।

धर्म का वास्तविक मर्म समझ गए थे भाई जी

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म का वास्तविक मर्म क्या होता है, इसे नित्य लीलालीन गृहस्थ संत भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने समझा था। उसी के अनुरूप देश व लोकहित में उनका पूरा जीवन समर्पित रहा। सीएम योगी ने कहा कि भाई जी ने श्रीमद्भगवद्गीता के आदर्शों को लेकर कल्याण के आदि संपादक के रूप में जो मानव कल्याण की, सनातन संस्कृति की सेवा प्रारम्भ की, उसी के अनुसार अपना जीवन भी जीया। वास्तव में उनका पूरा जीवन सनातन धर्म संस्कृति के आदर्शों के प्रति समर्पित रहा।

सनातन धर्म, जीवन पद्धति है

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजापाठ या उपासना की विधियों तक ही सीमित नहीं है। यह मूलतः जीवन पद्धति है, जिसमें समस्त मानव कल्याण, सांसारिक अभ्युदय, निःश्रेष्य के साथ भौतिक जीवन में उत्कर्ष और मोक्ष प्राप्ति तक की विराटता समाहित है। उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ संपूर्णता के साथ समझना होगा। गीता के अनुसार धर्म छोटे से मार्ग तक सीमित नहीं है। अपने कर्तव्य के प्रति आग्रही व ईमानदार बनकर ही हम धार्मिक कहला सकते हैं अन्यथा हमें धार्मिक कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह धर्म के साथ न्याय भी नहीं होगा। कर्तव्य के प्रति ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करने वाला ही सच्चा सनातन धर्मावलंबी बनता है।

”मैं ही बड़ा” का भाव पैदा करता है अपनी द्वंद्व

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ”मैं ही बड़ा” सनातन में यह भाव कभी नहीं होता। यह मेरा है, यह तेरा है का भाव संकुचित बुद्धि के लोग रखते हैं। दुनिया में द्वंद इसी भाव से शुरू होता है। यह हर व्यक्ति जानता है कि सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद, सबसे प्राचीन धार्मिक नगरी काशी और सबसे पहले राजा मनु थे। विचार करना होगा कि हम से प्रेरणा लेने वाले अर्वाचीन मत, मजहब आज छा गए हैं। इसका कुछ तो कारण होगा। इस विचारणीय बिंदु भी पर हमें भाई जी का जीवन प्रेरित करता है।

प्रेरणादायी है भाई जी के जीवन में सनातन धर्म का भाव

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म का भाव भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार के जीवन में देखने को मिलता है। सनातन धर्म-संस्कृति, मानवता, भारत के राष्ट्रीय आंदोलन व जीवमात्र के प्रति कल्याण की भावना से जुड़ा कोई भी ऐसा अभियान नहीं, जिसमें भाई जी ने प्रत्यक्ष भूमिका न निभाई हो। गीताप्रेस और कल्याण को उन्होंने अपनी सेवा का माध्यम बनाया। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा। सनातन धर्म हमेशा कहता है कि आत्मा कभी मरती नहीं। वह अजर और अमर है, सिर्फ देह बदलती है। इसी भावना के अनुरूप भाई जी के विचार हमें सदैव प्रेरणा देते हैं।

भारत में प्रारंभ हो चुका है सांस्कृतिक अभ्युदय

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाई जी जिन-जिन अभियानों से जुड़े रहे, उनमें से सभी कार्य एक-एक करके पूरे होते दिख रहे हैं। अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है। काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प हो गया है। ब्रज क्षेत्र नए कलेवर में निखर रहा है। व्यापक परिवर्तन के रूप में प्राकृतिक खेती के माध्यम से भारतीय गोवंश को पुनर्जीवन मिल रहा है। योग को वैश्विक मान्यता मिली है। प्रयाग का भव्य एवं दिव्य कुंभ यूनेस्को की तरफ से मानवता की मूर्ति धरोहर घोषित हो चुका है। यह सभी भारत के सांस्कृतिक अभ्युदय के प्रारंभ का प्रमाण हैं।

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