बाजार से भी सस्‍ता सोना खरीदने का मौका दे रही सरकार, पैसा लगाने से पहले यहां समझिए इसके फायदे-नुकसान

मोदी सरकार अब एक बार फिर सस्‍ता सोना खरीदने का मौका दे रही है. सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड की अगली खेप 17 मई से 5 दिन के लिए खुल जाएगी. आरबीआई ने इसकी कीमत जारी कर दी है और कहा है कि डिजिटल माध्‍यम से पेमेंट करने पर 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट भी दी जाएगी. ऐसे में अगर आप सस्‍ता सोना खरीदना चाहते हैं तो इन 5 दिनों के अंदर सब्‍सक्राइब कर सकते हैं. लेकिन सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड में निवेश करने से पहले आपको इसके फायदे-नुकसान के बारे में पता होना चाहिए. इसी को ध्‍यान में रखते हुए हम आपको इस बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं.

गोल्‍ड बॉन्‍ड के जरिए आम लोगों को सरकार सोना खरीदने का बेहतर विकल्‍प देती है. इसके तहत सरकार की ओर से आरबीआई गोल्‍ड बॉन्‍ड जारी करता है. आप किसी बैंक या पोस्‍ट ऑफिस में ग्राम के हिसाब से तय प्राइस पर गोल्‍ड बॉन्‍ड खरीद सकते है. इस बार के लिए आरबीआई ने प्रति ग्राम का भाव 4,777 रुपये तय किया गया है.

सोने की कीमत के अलावा ब्‍याज का भी  फायदा

कोई भी व्‍यक्ति एक वित्‍त वर्ष के दौरान गोल्‍ड बॉन्‍ड में कम से कम 2 ग्राम और अधिकतम 500 ग्राम सोना खरीद सकता है. सब्‍सक्रिप्‍शन के बाद गोल्‍ड बॉन्‍ड का भाव मार्केट प्राइस से लिंक हो जाता है. यानी बाजार में सोने के भाव में उतार-चढ़ाव का असर इसपर आपके गोल्ड होल्डिंग पर भी पड़ेगा. सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड की सबसे खास बात है कि इस पर सालाना 2.75 फीसदी की दर से ब्‍याज मिलता है. इस प्रकार सोने के चढ़ते भाव के साथ-साथ आपको सालाना ब्‍याज भी मिलेगा.

सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड स्‍कीम के बारे में जरूरी जानकारी

  • इस स्‍कीम के तहत ग्राम के हिसाब से सोना खरीदने की सहूलियत मिलती है. निवेशकों को निवेश की रकम को लेकर पूरी छूट रहती है.
  • गोल्‍ड बॉन्ड में निवेश करने पर सोने की सेफ्टी और स्‍टोरेज की चिंता नहीं होती है.
  • चूंकि, यह सरकारी स्‍कीम है. ऐसे में सोने की शुद्धता के बारे में चिंता करने की जरूरत ही नहीं होती.
  • गोल्‍ड बॉन्‍ड स्‍कीम 8 साल में मैच्‍योर होती है. किसी भी व्‍यक्ति के पास विकल्‍प होता है कि वो इस सोने को पेपर या डिमैट फॉर्म में रख सकें.
  • गोल्‍ड बॉन्‍ड में निवेश करने के 5 साल बाद से प्री-मैच्‍योर विड्रॉल का विकल्‍प मिलता है.
  • लोन लेने के लिए इन बॉन्‍ड्स को कोलेटरल के तौर पर रखा जा सकता है.
  • इन्‍वेस्‍टर्स के पास विकल्‍प होता है कि वे गोल्‍ड बॉन्‍ड खरीदने के लिए चेक, कैश, डिमांड ड्राफ्ट या किसी इलेक्‍ट्रॉनिक माध्‍यम से पेमेंट करें.
  • सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड में आपको इसमें नॉमिनेशन की भी सुविधा होती है.
  • मैच्‍योरिटी के समय तक गोल्‍ड बॉन्‍ड होल्‍ड करने पर टैक्‍स भी नहीं देना होता है. इसका मतलब है कि गोल्‍ड बॉन्‍ड में कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स छूट के दायरे में आता है.

गोल्‍ड बॉन्‍ड में निवेश का जोखिम क्‍या है?

आमतौर पर सोने में निवेश सबसे सुरक्षित विकल्‍प के तौर पर माना जाता है. यही वजह से है सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड स्‍कीम के साथ जोखिम भी बहुत कम होता है. हालांकि, यह भी बात है कि सोने का भाव मार्केट परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है. ऐसे में भाव में गिरावट से निवेशक की पूंजी पर जोखिम होता है.

क्‍या गोल्‍ड बॉन्‍ड में निवेश करना फायदेमंद है?

अगर आप एसेट एलोकेशन के तौर पर गोल्‍ड बॉन्‍ड में निवेश करना चाहते हैं तो यह आपके लिए सबसे बेहतर विकल्‍प साबित हो सकता है. लेकिन जानकारों का सुझाव है कि गोल्‍ड बॉन्‍ड में लिक्विडिट के लिहाज से निवेश नहीं करना चाहिए.

Check Also

विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटा, जून में अब तक FPI ने बाजार में डाले 13,424 करोड़ रुपए

  नई दिल्लीः विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने जून में अबतक भारतीय बाजारों में शुद्ध …