कोरोना का खतरा, लेकिन अंडरपास में सोने की मजबूरी, जानें AIIMS पहुंचे लोगों का दर्द

दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार सख्ती बढ़ा रही है. लेकिन देश के सबसे सबसे बड़े मेडिकल संस्थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के बाहर ही इन कोरोना नियमो की धज्जियां उड़ रही हैं. देशभर से यहां इलाज कराने आए लोग सड़क, बस स्टॉप के नीचे और अंडरपास में एक साथ रह रहे है। यहां न सोशल डिस्टेंसिंग हैं, न मास्क की पाबंदी. एम्स के बाहर ऐसे हालात तब हैं, जब दिल्ली में पिछले 2 दिनों से कोरोना केस 27,000 से ज्यादा आ रहे हैं. संक्रमितों की लगातार मौत हो रही है, और पाबंदियां बढ़ाई जा रही हैं.

अलग-अलग राज्यों से इलाज के लिए एम्स पहुंचने वाले लोगों की भी अपनी मजबूरी है. कोई अपने पिता की आंखों का इलाज कराने आया है, तो कोई अपने बच्चे का. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपने पूरे परिवार के साथ आए हैं, ताकी परिवार के सदस्य का ध्यान रखने के लिए बारी-बारी शिफ्ट लगाई जा सके.

झारखंड से 2 बेटों के साथ अपनी आंखों का इलाज कराने एम्स आए राजेंद्र पासवान ने अपना दुख बताया. उन्होंने कहा कि बड़ी परेशानी के साथ कड़ाके की ठंड में वे भूखे-प्यासे इलाज करा रहे हैं. वीकेंड कर्फ्यू के कारण उन्हें खाने को नहीं मिला. सरकार की तरफ से भी किसी ने सुध नहीं ली.

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर से बच्ची का इलाज कराने एम्स पहुंचे मनोज कुमार ने बताया कि इलाज तो मिल रहा है, लेकिन कोरोना का डर भी बरकरार है. रोज-रोज एम्स नहीं आ सकते, इसलिए मजबूरी में 2 छोटे बच्चों और पत्नी के साथ बस स्टॉप के नीचे सो रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि जल्द उनकी बच्ची ठीक हो जाएगी और वे अपने परिवार के साथ घर चले जाएंगे.

इलाज कराकर लौटने पर फैला सकते हैं कोरोना

अपने परिवार के साथ दूसरे राज्यों से इलाज कराने पहुंच रहे लोग लौटने पर अपने गांव या शहर के लोगों के लिए भी परेशानी का सबब बन सकते हैं. इनमें से किसी को भी संक्रमण होने पर वह लौटकर इलाके के लोगों को भी संक्रमित कर सकता है. इन चुनौतियों के बीच भी यह लोग इलाज कराने के लिए मजबूर हैं.

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